भारतकोश
हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 23, कुल 150 में से

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पृष्ठ 23

हिन्द स्वराज्य त्यों प्रजा तैयार होती जाती है। प्रजा एक दिन में नहीं बनती, उसे बनने में कई बरस लग जाते हैं। पाठक : बंग-भंग के नतीजे आपने क्या देखे ? संपादक : आज तक हम मानते आये हैं कि बादशाह से अर्ज करना चाहिए और वैसा करने पर भी दाद न मिले तो दुःख सहन करना चाहिए, अलबत्ता अर्ज तो करते ही रहना चाहिए बंगाल के टुकड़े होने के बाद लोगों ने देखा कि हमारी अर्ज के पीछे कुछ ताक़त चाहिए, लोगों में कष्ट सहन करने की शक्ति चाहिए। यह नया जोश टुकड़े होने का अहम नतीजा माना जाएगा। यह जोश अखबारों के लेखों में दिखाई दिया। लेख कड़े होने लगे। जो बात लोग डरते हुए या चोरी-चुपके करते थे, वह खुल्मखुल्ला होने और लिखी जाने लगी। स्वदेशी का आन्दोलन चला। अंग्रेजों को देखकर छोटे-बड़े सब भागते थे, पर अब नहीं डरते, मार-पीट से भी नहीं डरते, जेल जाने में भी उन्हें कोई हर्ज नहीं मालूम होता और हिन्द के पुत्र रत्न आज देश निकाला भुगतते हुए विदेशों में विराजमान हैं। यह चीज उस अर्ज से अलग है। यों लोगों में खलबली मच रही है। बंगाल की हवा उत्तर में पंजाब तक और दक्षिण में मद्रास में कन्याकुमारी तक पहुँच गई है। पाठक : इसके अलावा और कोई जानने लायक नतीजा आपको सूझता है ? संपादक : बंग-भंग से जैसे अंग्रेजी जहाज़ में दरार पड़ी है, वैसे ही हममें भी दरार फूट पड़ी है। बड़ी घटनाओं के परिणाम भी यों बड़े ही होते हैं। हमारे नेताओं में दो दल हो गये हैं: एक मॉडरेट और दूसरा एक्स्ट्रीमिस्ट। उनको हम ‘धीमे’ और ‘उतावले’ कह सकते हैं। (‘नरम दल’ और ‘गरम दल’ शब्द भी चलते हैं।) कोई मॉडरेट को डरपोक पक्ष और एक्स्ट्रीमिस्ट को हिम्मतवाला पक्ष भी कहते हैं। सब अपने-अपने ख़्यालों के मुताबिक इन दो शब्दों का अर्थ करते हैं। यह सच है कि ये जो दल हुए हैं, उनके बीच ज़हर भी पैदा हुआ है। एक दल दूसरे का भरोसा नहीं करता, दोनों एक-दूसरे को ताना मारते हैं। सूरत कांग्रेस के समय करीब-करीब मार-पीट भी हो गई। ये जो दो दल हुए हैं वह देश के लिए अच्छी निशानी नहीं हैं, ऐसा मुझे तो लगता है, लेकिन मैं यह भी मानता हूँ कि ऐसे दल लम्बे अरसे तक टिकेंगे नहीं। इस तरह कब तक ये दल रहेंगे, यह तो नेताओं पर आधार रखता है। 22