हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)
Hind Swaraj by Mahatma Gandhi
मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 42, कुल 150 में से
संदर्भ में पढ़ेंसभ्यता का दर्शन पाठक : अब तो आपको सभ्यता की भी बात करनी होगी। आपके हिसाब से तो यह सभ्यता बिगाड़ करने वाली है। संपादक : मेरे हिसाब से ही नहीं, बल्कि अंग्रेज लेखकों के हिसाब से भी यह सभ्यता बिगाड़ करने वाली है। उसके बारे में बहुत किताबें लिखी गई हैं। वहाँ इस सभ्यता के खिलाफ़ मंडल भी क़ायम हो रहे हैं। एक लेखक ने 'सभ्यता उसके कारण हिन्द स्वराज्य की और उसकी दवा' नाम की किताब लिखी है। उसमें सच्ची खुमारी उसी उसने यह साबित किया है कि यह सभ्यता एक तरह को हो सकती है, जो का रोग है। आत्मबल अनुभव करके शरीर बल से पाठक : यह सब हम क्यों नहीं जानते ? नहीं दबेगा और निडर रहेगा तथा सपने में संपादक : इसका कारण तो साफ है। कोई भी आदमी भी तोप बल का अपने खिलाफ़ जाने वाली बात करे ऐसा शायद ही उपयोग करने की होता है। आज की सभ्यता के मोह में फँसे हुए लोग बात नहीं सोचेगा। उसके खिलाफ़ नहीं लिखेंगे, उल्टे उसको सहारा मिले ऐसी ही बातें और दलीलें ढूँढ निकालेंगे। यह वे जान- बूझकर करते हैं ऐसा भी नहीं है। वे जो लिखते हैं उसे खुद सच मानते हैं। नींद में आदमी जो सपना देखता है, उसे वह सही मानता है। जब उसकी नींद खुलती है तभी उसे अपनी गलती मालूम होती है। ऐसी ही दशा सभ्यता के मोह में फँसे हुए आदमी की होती है। हम जो बातें पढ़ते हैं वे सभ्यता की हिमायत करने वालों की लिखी बातें होती हैं। उनमें बहुत होशियार और भले आदमी हैं। उनके लेखों से हम चौंधिया जाते हैं। यों एक के बाद दूसरा आदमी उसमें फँसता जाता है। पाठक : यह बात आपने ठीक कही। अब आपने जो कुछ पढ़ा और सोचा है, उसका ख़्याल मुझे दीजिए। संपादक : पहले तो हम यह सोचें कि सभ्यता किस हालत का नाम है। इस सभ्यता की सही पहचान तो यह है कि लोग बाहरी दुनिया की खोजों में और 41