हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)
Hind Swaraj by Mahatma Gandhi
मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा
DevanagariHindipublished150 पृष्ठ
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हिन्द स्वराज्य
रहते हैं और उनके रहने में हम ही मददगार हैं। उनके हथियार तो बिल्कुल बेकार हैं। इस मौके पर मैं आपको याद दिलाता हूँ कि जापान में अंग्रेजी झंडा लहराता है ऐसा आप मानिये। जापान के साथ अंग्रेजों ने जो करार किया है वह अपने व्यापार के लिए किया है और आप देखेंगे कि जापान में अंग्रेज लोग अपना व्यापार खूब जमाएँगे। अंग्रेज अपने माल के लिए सारी दुनिया को अपना बाजार बनाना चाहते हैं। यह सच है कि ऐसा वे नहीं कर सकेंगे। इसमें उनका कोई कुसूर नहीं माना जा सकता। अपनी कोशिश में वे कोई कसर नहीं रखेंगे।
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