हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)
Hind Swaraj by Mahatma Gandhi
मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 66, कुल 150 में से
संदर्भ में पढ़ेंहिन्दुस्तान की दशा-तीन संपादक : आपका आख़िरी सवाल बड़ा गम्भीर मालूम होता है, लेकिन सोचने पर वह सरल मालूम होगा। यह सवाल उठा है, उसका कारण भी रेल, वकील और डॉक्टर हैं। वकीलों और डॉक्टरों का विचार तो अभी करना बाकी है। रेलों का विचार हम कर चुके। इतना मैं जोड़ता हूँ कि मनुष्य इस तरह पैदा किया गया है कि अपने हाथ-पैर से बने उतनी ही आने-जाने वगैरह की हलचल उसे करनी चाहिए। अगर हम रेल वगैरह साधनों से दौड़धूप करें ही नहीं, तो बहुत पेचीदे सवाल हमारे सामने आयेंगे ही नहीं। हम खुद होकर दुः ख को न्योतते हैं। भगवान ने मनुष्य की हद उसके शरीर की बनावट से ही बाँध दी, लेकिन मनुष्य ने उस भगवान ने मनुष्य की बनावट की हद को लाँघने के उपाय ढूँढ निकाले। हद उसके शरीर की मनुष्य को अक्ल इसलिए दी गई है कि उसकी मदद बनावट से ही बाँध से वह भगवान को पहचाने, पर मनुष्य ने अक्ल का दी, लेकिन मनुष्य ने उपयोग भगवान को भूलने में किया। मैं अपनी कुदरती उस बनावट की हद हद के मुताबिक अपने आसपास रहने वालों की ही को लाँघने के उपाय सेवा कर सकता हूँ, पर मैंने तुरन्त अपनी मगरूरी में ढूँढ निकाले। ढूँढ निकाला कि मुझे तो सारी दुनिया की सेवा अपने तन से करनी चाहिए। ऐसा करने में अनेक धर्मों के और कई तरह के लोगों का साथ होगा। यह बोझ मनुष्य उठा ही नहीं सकता और इसलिए अकुलाता है। इस विचार से आप समझ लेंगे कि रेलगाड़ी सचमुच एक तूफानी साधन है। मनुष्य रेलगाड़ी का उपयोग करके भगवान को भूल गया है। पाठक : पर मैं तो अब जो सवाल मैंने उठाया है उसका जवाब सुनने को अधीर हो रहा हूँ। मुसलमानों के आने से हमारा एक राष्ट्र रहा या मिटा ? संपादक : हिन्दुस्तान में चाहे जिस धर्म के आदमी रह सकते हैं, उससे वह एक राष्ट्र मिटने वाला नहीं है। जो नये लोग उसमें दाखिल होते हैं, वे उसकी प्रजा को तोड़ नहीं सकते, वे उसकी प्रजा में घुलमिल जाते हैं। ऐसा हो तभी कोई मुल्क एक राष्ट्र माना जाएगा। ऐसे मुल्क में दूसरे लोगों का समावेश करने का गुण होना चाहिए। हिन्दुस्तान ऐसा था और आज भी है। यों तो 65