भारतकोश
हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 86, कुल 150 में से

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पृष्ठ 86

सच्ची सभ्यता कौन सी ? पाठक : आपने रेल को रद्द कर दिया, वकीलों की निन्दा की, डॉक्टरों को दबा दिया। तमाम कलकाम (यंत्रों) को भी आप नुकसानदेह मानेंगे, ऐसा मैं देख सकता हूं। तब सभ्यता कहें तो किसे कहें ? संपादक : इस सवाल का जवाब मुश्किल नहीं है। मैं मानता हूं कि जो सभ्यता हिन्दुस्तान ने दिखाई है, उस तक दुनिया में कोई नहीं पहुंच सकता। जो बीज हमारे पुरखों ने बोए हैं, उनकी बराबरी कर सके ऐसी कोई चीज देखने में जो बीज हमारे पुरखों ने नहीं आई। रोम मिट्टी में मिल गया, ग्रीस का बोये हैं, उनकी बराबरी सिर्फ नाम ही रह गया, मिस्र की बादशाही चली कर सके ऐसी कोई चीज गई, जापान पश्चिम के शिकंजे में फंस गया और देखने में नहीं आई। रोम चीन का कुछ भी कहा नहीं जा सकता। लेकिन मिट्टी में मिल गया, ग्रीस गिरा-टूटा जैसा भी हो, हिन्दुस्तान आज भी का सिर्फ नाम ही रह गया, अपनी बुनियाद में मजबूत है। मिस्र की बादशाही चली जो रोम और ग्रीस गिर चुके हैं, उनकी गई, जापान पश्चिम के किताबों से यूरोप के लोग सीखते हैं। उनकी शिकंजे में फंस गया और गलतियां वे नहीं करेंगे ऐसा गुमान रखते हैं। चीन का कुछ भी कहा ऐसी उनकी कंगाल हालत है, जबकि हिन्दुस्तान नहीं जा सकता। लेकिन अचल है, अडिग है। यह उसका भूषण है। गिरा-टूटा जैसा भी हो, हिन्दुस्तान पर आरोप लगाया जाता है कि वह हिन्दुस्तान आज भी अपनी ऐसा जंगली, ऐसा अज्ञानी है कि उससे जीवन बुनियाद में मजबूत है। में कुछ फेरबदल कराये ही नहीं जा सकते। यह आरोप हमारा गुण है दोष नहीं। अनुभव से जो हमें ठीक लगा है उसे हम क्यों बदलेंगे ? बहुत से अक्ल देने वाले आते-जाते रहते हैं, पर हिन्दुस्तान अडिग रहता है। यह उसकी खूबी है, यह उनका लंगर है। सभ्यता वह आचरण है जिससे आदमी अपना फर्ज अदा करता है। फर्ज अदा करने के मानी है नीति का पालन करना। नीति के पालन का मतलब है अपने मन और इन्द्रियों को बस में रखना। ऐसा करते हुए हम अपनी 85