भारतकोश
हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 89, कुल 150 में से

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पृष्ठ 89

हिन्द स्वराज बच्ची की शादी हो जाती है, जिस देश में बारह साल की उम्र के लड़के- लड़कियां घर संसार चलाते हैं, जिस देश में स्त्री एक से ज्यादा पति करती है, जिस देश में नियोग की प्रथा है, जिस देश में धर्म के नाम पर कुमारिकाएं बेसवाएं बनती हैं, जिस देश में धर्म के नाम पर पाड़ों और बकरों की हत्या होती है, वह देश भी हिन्दुस्तान ही है। ऐसा होने पर भी आपने जो बताया वह क्या सभ्यता का लक्षण है ? किसी भी सभ्यता के संपादक : आप भूलते हैं। आपने जो दोष बताये मातहत सभी लोग संपूर्णता वे तो सचमुच दोष ही हैं। उन्हें कोई सभ्यता तक नहीं पहुंच पाए हैं। नहीं कहता। वे दोष सभ्यता के बावजूद कायम हिन्दुस्तान की सभ्यता का रहे हैं। उन्हें दूर करने के प्रयत्न हमेशा हुए झुकाव नीति को मजबूत है, और होते ही रहेंगे। हमसे जो नया जोश पैदा करने की ओर है, पश्चिम हुआ है, उसका उपयोग हम इन दोषों को दूर की सभ्यता का झुकाव करने में कर सकते हैं। मैंने आपको आज की अनीति को मजबूत करने सभ्यता की जो निशानी बताई, उसे इस सभ्यता की ओर है, इसलिए मैंने के हिमायती खुद बताते हैं। मैंने हिन्दुस्तान की उसे हानिकारक कहा है। सभ्यता का जो वर्णन किया, वह वर्णन नई पश्चिम की सभ्यता सभ्यता के हिमायतियों ने किया है। निरीश्वरवादी है, किसी भी देश में किसी भी सभ्यता के हिन्दुस्तान की सभ्यता मातहत सभी लोग संपूर्णता तक नहीं पहुंच पाये ईश्वर को मानने वाली है। हैं। हिन्दुस्तान की सभ्यता का झुकाव नीति को मजबूत करने की ओर है, पश्चिम की सभ्यता का झुकाव अनीति को मजबूत करने की ओर है, इसलिए मैंने उसे हानिकारक कहा है। पश्चिम की सभ्यता निरीश्वरवादी है, हिन्दुस्तान की सभ्यता ईश्वर को मानने वाली है। यों समझकर, ऐसी श्रद्धा रखकर, हिन्दुस्तान के हितचिंतकों को चाहिए कि वे हिन्दुस्तान की सभ्यता से, बच्चा जैसे मां से चिपटा रहता है, वैसे चिपटे रहें। 88