भारतकोश
हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 94, कुल 150 में से

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पृष्ठ 94

हिन्द स्वराज्य रहें तो हम उनका समावेश यहाँ कर सकते हैं। अंग्रेज अगर अपनी सभ्यता के साथ रहना चाहें, तो उनके लिए हिन्दुस्तान में जगह नहीं है। ऐसी हालत पैदा करना हमारे हाथ में है। पाठक : अंग्रेज हिन्दुस्तानी बनें, यह नामुमकिन है। संपादक : हमारा ऐसा कहना यह कहने के बराबर है कि अंग्रेज मनुष्य नहीं हैं। वे हमारे जैसे बनें या न बनें, इसकी हमें परवाह नहीं है। हम अपना घर साफ करें। फिर रहने लायक लोग ही उसमें रहेंगे, दूसरे अपने-आप चले जाएँगे। ऐसा अनुभव तो हर हम जगत को अपनी आदमी को हुआ होगा। दमड़ी के नाप से नापते पाठक : ऐसा होने की बात इतिहास में तो हमने हैं। अगर हम गुलाम हैं तो नहीं पढ़ी। जगत को भी गुलाम मान संपादक : जो चीज़ा इतिहास में नहीं देखी लेते हैं। हम कंगाल दशा वह कभी नहीं होगी, ऐसा मानना मनुष्य की में हैं, इसलिए मान लेते प्रतिष्ठा में अविश्वास करना है। जो बात अक्ल हैं कि सारा हिन्दुस्तान में आ सके, उसे आखिर हमें आजमाना तो ऐसी दशा में है। दरअसल चाहिए ही। ऐसा कुछ नहीं है। फिर हर देश की हालत एक सी नहीं होती। भी हमारी गुलामी सारे हिन्दुस्तान की हालत विचित्र है। हिन्दुस्तान का देश की गुलामी है। हम बल असाधारण है। इसलिए दूसरे इतिहासों से अपने ऊपर राज करें वही हमारा कम संबंध है। मैंने आपको बताया कि दूसरी स्वराज्य है और वह सभ्यताएँ मिट्टी में मिल गयीं, जबकि हिन्दुस्तानी स्वराज्य हमारी सभ्यता को आँच नहीं आई है। हथेली में है। पाठक : मुझे ये सब बातें ठीक नहीं लगतीं। हमें लड़कर अंग्रेजों को निकालना ही होगा, इसमें कोई शक नहीं। जब तक वे हमारे मुल्क में हैं, तब तक हमें चैन नहीं पड़ सकता। ‘पराधीन सपनेहु सुख नाहीं’ ऐसा देखने में आता है। अंग्रेज यहाँ हैं इसलिए हम कमज़ोर होते जा रहे हैं। हमारा तेज चला गया है और हमारे लोग घबराए, से दिखते हैं। अंग्रेज हमारे देश के लिए यम जैसे हैं। उस यम को हमें किसी भी प्रयत्न से भगाना होगा। 93