हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ १५१ ] कूच किया, त्यों ही इन लोगों ने अवसर पाकर पूना में विद्रोह कर दिया, और राजधानी को अपने अधिकार में ले लिया और भावी पेशवा की माता गंगाबाई को राजनेत्री ठहराया। यह राज्य-विप्लव शीघ्र ही सारे देश में फैल गया। इस नये राज्यशासन को, जो वास्तव में प्रजातन्त्र- राज्य था और जिसे महाराष्ट्र में "बड़ भाई राज" कहते हैं, सारे दुर्गों और नगरों ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। जब इस आश्चर्यजनक विद्रोह का समाचार राघोबा को मिला तो उसने अपनी सारी सेनाके साथ पूना को लौट चलने का विचार किया; लेकिन जब उसे यह बात विदित हुई कि बलवाइयों की सेना उस से सामना करने के लिये पहिले ही पूना से रवाना हो चुकी है तो भयभीत होकर कुछ स्वार्थी, घूसखोर तथा चाप- लूस साथियों के साथ उत्तर की ओर लौट गया और रास्ते के गांवों और शहरों को विदेशीय लुटेरों की तरह लूटता-पीटता और जलाता हुआ आगे बढ़ता गया। उसे अब भी यह आशा बनी हुई थी कि यदि गङ्गा- बाई को पुत्र न पैदा हुआ तो सभी लोग पुनः उसके पक्षपाती हो जायेंगे। उसने कोरेगांव में विद्रोहियों की सेना का सामना करके उसे परास्त किया और उनके सेनापति त्र्यम्बकराव मामापेठे को मार डाला। पेठे की मृत्यु से विद्रोहियों की बड़ी क्षति हुई, क्योंकि उनका एक वीर एवं कट्टर नेता मारा गया। इतने पर भी प्रसिद्ध नेता नाना फड़नवीस और बापू ने महाराष्ट्र जाति की सहायता पाकर लड़ाई बराबर जारी रक्खी। इस समय सारे महाराष्ट्र, नहीं नहीं सारे भारतवर्ष के सभी लोगों का ध्यान पुरन्धर के क़िले की ओर लगा हुआ था, जहां गर्भवती राज- कुमारी गंगाबाई बड़े पहरे में रक्खी गई थी। ज्यों ज्यों इनका प्रसव- काल निकट आता जाता त्यों त्यों लोगों की उत्सुकता बढ़ती जाती थी। सभी लोग सर्वदा पुरन्धर के नवीन सुखदायक समाचार सुनने के लिये लालायित हो रहे थे। मन्दिरों, देवालयों और तीर्थ स्थानों में धार्मिक जन-समूह ईश्वर से प्रार्थना करने लगे कि महारानी जी को पुत्र रत्न पैदा