भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

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पृष्ठ 18

[ १८ ] के भविष्यवक्ता, पूज्यपाद स्वामी रामदास जी बड़ी प्रसन्नता तथा गौरव के साथ एक स्वप्न के सम्बन्ध में कहते हैं, "कि जो कुछ मैंने स्वप्नावस्था में देखा था उसकी पूर्ति पहले ही हो गई थी। जिस स्वप्न को मैंने अन्ध- कारपूर्ण रात्रि में देखा था वह •अक्षरशः सत्य निकला, अर्थात् भारत की निद्रा भङ्ग हुई, लोग अपने आपको पहचानने लगे। जो भारत से घृणा करते थे तथा ईश्वर के प्रति अपराध करते थे उनको दृढ़ हाथों से कुचल दिया गया। सचमुच भारत पवित्र और भाग्यशाली देश है। क्योंकि भारत के ध्येय को परमात्मा ने अपना ध्येय बना लिया है, इस लिये औरङ्गज़ेब का पतन हो जायगा। जो लोग सिंहासन पर विराजते थे वे पदच्युत हो गये और जो किसी समय राज्यसिंहासन से उतारे गये थे पुनः सुशोभित हो गये। मनुष्यों का श्रेय, शब्दों की अपेक्षा उनके कर्त्तव्यों से भलीभांति विदित होता है। सचमुच भारतवर्ष एक पवित्र पुण्यक्षेत्र है, इसके धर्म की रक्षा अब राजधर्म से होगी। अब राक्षसी- शक्ति द्वारा देश का पावन जल अपवित्र नहीं होता रहेगा और एक बार पुनः इस पुण्य भूमि पर हमें यज्ञ पूजनादि कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त होगा।" यह धर्मयुद्ध परमात्मा के नाम पर आरम्भ किया गया था। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए जब महाराज शिवाजी एक स्वतन्त्रराज्य को स्थापित करने में फलीभूत हुए तो उन्होंने इस ईश्वरदत्त राज्य को अपने आध्यात्मिक तथा राजनैतिक पथप्रदर्शक गुरु स्वामी रामदासजी के चरणों श्रद्धापूर्वक भेंट के रूप में अर्पण किया। किन्तु स्वामी जी ने भी उसी य को स्मरण कर उक्त राज्य अपने सुयोग्य शिष्य शिवाजी को मनुष्य- ति के उपकार तथा ईश्वरीय धर्म की रक्षार्थेतु प्रसादरूप में निछावर किया और कहा— राज्य शिवाजी चें नव्हे—राज्य धर्माचें आहे। 🌼 महाराज शिवाजी से लेकर बाजीराव तक कर्मवीर मरहठों के 🌼 राज्य शिवा जी का नहीं है, किन्तु धर्म का है।