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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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अतिआवश्यक सावधानियाँ

१- स्त्री के मासिक धर्म समय पर निरन्तर तीन दिन तक औषधि, दूध, दही, चावल, ठण्डा पानी, ठण्डे फल अथवा अन्य कोई ठण्डी वस्तु आदि का भी सेवन नहीं करना चाहिए। इन असावधानियों के कारण ही स्त्रियों में ९० प्रतिशत रोग उत्पन्न हो जाते हैं। इसलिए यह सावधानी अवश्य रखनी चाहिए, इन तीन दिनों में स्त्री सेवन से पुरुष को विषैप (आतशक) नाम का रोग लग जाता है।

२- डबल बैड अर्थात् नित्य पति-पत्नी का एक साथ शयन करना बहल भयंकर हो जाता है। एक साथ सोने से मन विवश होकर काम की इच्छा करता है और उपस्थितियों में उत्तेजना होने लगती है। जिससे मैथुन करना ही पड़ता है। इस कारण एक साथ सोने वाले प्रायः सन्तान हीन और निर्बल तथा नित्य नये रोगों से ग्रसित देखने में आते हैं।

३- भोजन के कम से कम दो घण्टे पश्चात् ही स्त्री सेवन करना चाहिये, इससे पूर्व स्त्री सेवन होने से पेट, नाभ, नले आदि दोष युक्त हो जाते हैं।

४- यदि रति समय किसी को भी शौच की इच्छा होने लगे तो पहले शौच जाना चाहिए, नहीं तो पेट में वायु विकार मलावरोध आदि दोष उत्पन्न हो जाते हैं।

५- जुकाम, खाँसी, ज्वर, निर्बलता, शोक अथवा अन्य कोई शारीरिक व्याधि होने पर स्त्री प्रसंग नहीं करना चाहिए, नहीं तो उस व्याधि में अति अधिकता हो जायगी और क्षय रोग भी हो सकता है।

६- बच्चे आपके प्रेमालाप, आर्लिंगन, सहवास आदि के कृत्यों को न देख सकें, अन्यथा वे भी आपस में वैसा ही कृत्य

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

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