इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 133, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ेंचांदहवीं रात्रि में उत्तम गुणवाला विद्या युक्त बालक।
पन्द्रहवीं रात्रि की कन्या राजपत्नी, सौभाग्यवती।
सोलहवीं रात्रि का पुत्र सम्पूर्ण विद्याओं और गुणों से युक्त राज्य करने हारा होता है।
मासिक धर्म से लेकर १६ रात्रि तक स्त्री का रजः दिन प्रतिदिन शुद्ध होता जाता है। रजः जितना शुद्ध होता है उतनी ही सन्तान उत्तम होती है।
देश की उन्नति चाहने वाले, दुराचार, भ्रष्टाचार, व्यभिचार और वर्णसंकर सन्तान न चाहने वाले पुरुषों यह सारे दोष तभी दूर हो सकते हैं। जब गर्भाधान के समय ४, ७, ११ और १३ रात्रियों को छोड़कर ५, ६, ८, ९, १०, १२, १४, १५ और १६ रात्रियों में ही गर्भाधान करें। फिर आप देखोगे कि २० वर्ष में जब ऐसा सन्तति प्रौढ़ होकर आगे बढ़ेगी तो वह सारे देश को ही नहीं संसार को पलट देगी। तब आप अनुभव करेंगे कि कलियुग में सत्युग जैसी सुख और शांति। परन्तु यह तभी सम्भव हो सकेगा जब आप इसे क्रियात्मक रूप दें।
श्री रामचन्द्र जी १२ कला के अवतार कहे जाते हैं और साथ में पुरुषोत्तम भी। श्री कृष्ण जी पूर्ण १६ कला के अवतार कहे जाते हैं। वह कलायें क्या हैं? क्या अब १२, १६ कला के पुरुष नहीं हो सकते? यह कलायें पुरुष को कैसे मिल सकती हैं, वह तो भगवान थे, हमारे बच्चे या हम वैसे कैसे बन सकते हैं?
एक बार महात्मा गांधी ने कहा था। हे मेरे भक्तों मेरी इच्छा है कि तुम मुझे भगवान मत बना देना। देखो आर्यों ने जिस प्रकार स्वामी दयानन्द को रखा है। तुम भी मुझे उसी प्रकार रखना।
कोन ऐसा व्यक्ति है जो पुरुष से भगवान की पदवी न चाहता हो। परन्तु महात्मा गांधी, राष्ट्रपिता, शान्ति के देवता ज्ञान के भण्डारी यह नहीं चाहते थे कि मुझे पुरुष की अपेक्षा भगवान की पदवी मिले। क्यों? वह ज्ञानी महात्मा गांधी पुरुषों की प्रवृत्ति इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
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