भारतकोश
इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

Devanagarihipublished250 पृष्ठ

पृष्ठ 139, कुल 250 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 139

गर्भ स्थित न होने के कारण और उसका उपचार

गर्भ स्थित न होने के अनेक कारण हैं। जिनमें से मुख्य यह हैं—

  1. १- गर्भाशय में मेध (चर्बी) का बढ़ जाना।
  2. २- गर्भाशय में शोथ (सूजन) का होना।
  3. ३- गर्भाशय में केशाद नाम के कीटों का प्रविष्ट हो जाना।
  4. ४- रजः और वीर्य का दूषित हो जाना।
  5. ५- वन्ध्यापन।
  6. ६- जनित इन्द्रियों का लघु या दीर्घ होना।
  7. ७- वीर्य में सन्तानोत्पादक कौट के अभाव का होना।

उपरोक्त व्याधियों का निराकरण इस प्रकार, करें—

१- गर्भाशय में मेध के बढ़ जाने से गर्भ द्वारा का मुख छोटा हो जाता है जिस कारण गर्भाशय में वीर्य नहीं पहुँच पाता ऐसी दशा में नारी रत्न चूर्ण का दो-तीन मास तक सेवन कराने से लाभ होगा (कुछ अनुभव में देखें प्रयोग नं. २५)।

२- गर्भाशय में शोथ का होना गर्भस्थित होने में बाधक है। ऐसी दशा में भपके से खींचा हुआ मकोय का जल १ तोला और अशोकारिष्ट एक तोला या पुनर्नवासव भोजन के पश्चात् दोनों समय तथा प्रातः गौ दूध के साथ चन्द्रप्रभा वटी की २ गोली। लगभग २-३ मास तक देने से रोग दूर होकर गर्भ स्थित हो जायगा।

३- केशाद नाम के कीटाणु सर के बालों को खा जाते हैं। ऐसी दशा में सर पर गंज नामक रोग हो जाता है। किसी भी

इच्छानुसार सन्तान

१३३

वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri