इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 151, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ेंगर्भिणी स्त्री को प्रति दिन पलास (ढाक) का एक पत्ता गाँदुघं के साथ पिलाओ तो उसके अति पराक्रमी पुत्र होगा और गर्भपात होने से रोक्ता है।
जिन स्त्रियों का गर्भपात हो जाता हो या बच्चा जन्मते ही या २,३ वर्ष का होकर जाता रहता हो तो ऐसी अवस्था में गर्भ स्थित होने के दूसरे मास से अन्त तक स्त्री को पुत्र जीवक के २ फलों की माँग प्रातः निहार मुँह ताजे जल से दें।
अथवा
कस्तुरी १ माशा, वंशलोचन ३ माशा, केशर ४ माशा, गुलाब पुष्प का जीरा ४ माशा, जीरा सफेद ४ माशा, तुलसी पत्र दो तोला, जाँबुत्री २ तोला, धतुरे का बीज १ नग, सहदेई पत्र ४ तोला। समस्त औषधियों को बारीक पीसकर १,१ रत्ती की गोलियों बनाकर छाया में सुखा लें।
प्रयोग विधि- जब निश्चय हो जाय कि गर्भ स्थित हो गया है तब से स्त्री को ४० दिन पर्यन्त २-२ गोली प्रातःकाल जल से दें और बालक उत्पन्न होने तक १-१ गोली खिलाते रहें। तत्पश्चात् बालक को आधी गोली प्रति दिन जल में घिसकर उस समय तक देते रहें जब तक बालक माता का दूध पीना न छोड़े।
लाभ- गर्भपात नहीं होता, बाल्यकाल में बच्चा मृत्यु के भय से बचा रहता है, बालक स्वस्थ और प्रसन्न रहता है।
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इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri