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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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आप जानते हैं! उसे इतना साहस, उत्साह, वीरता और युद्ध कुशलता कहाँ से मिली? सब जानते हैं। पर ध्यान कोई नहीं देता। जिस समय अभिमन्यु गर्भ में था। उस समय एक दिन रात्रि में सुभद्रा को निद्रा नहीं आ रही थी। सुभद्रा का मन खिन्न-सा हो रहा था। वीर अर्जुन यह बात जानते थे कि इस अवस्था में स्त्री का चित्त खिन्न होने से बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए सुभद्रा की खिन्नता दूर करने के लिये वीर अर्जुन ने चक्रव्युह के युद्ध की गाथा सुनानी आरम्भ कर दी, कि चक्रव्युह में किस प्रकार प्रवेश करके उसे खण्डित किया जाता है, इतना ही सुनकर सुभद्रा को निद्रा देवी ने अपनी शरण में ले लिया। जिस कारण अर्जुन ने गाथा यहाँ समाप्त कर दी थी। तभी तो अभिमन्यु ने चक्रव्युह को जाने से पूर्व सभा में कहा था कि मैं व्यूह में प्रवेश करना ही जानता हूँ और बाहर आना नहीं। सुभद्रा ने जितनी गाथा व्यूह की सुनी वह सब अभिमन्यु में, जन्म के ही साथ आ गई थी।

पाठकों आपके सामने एक और घटना प्रस्तुत करते हैं। वह भी ऐतिहासिक है। माता बच्चों को जैसा चाहे वैसा बना सकती है। माता के विचार संस्कार और शिक्षा का बच्चे के अन्तःकरण पर छाया चित्र की भाँति प्रभाव डालते हैं। और कच्चे घड़े की रेखा के सदृश्य अमिट हो जाते हैं। माता का डाला हुआ प्रभाव आयु पर्यन्त नहीं निकल सकता, चुम्बक से अधिक आकर्षण माता की बात-बात में विद्यमान है।

मदालसा देवी का नाम तो आपने सुना ही होगा, इस मर्म की भली प्रकार ज्ञाता थीं और जैसा चाहे वैसा पुत्र उत्पन्न कर लेने की अपने में शक्ति रखती थीं। वे सदाचार धर्मात्मा, सत्यनिष्ठ राजा ऋतुध्वज की महारानी थीं, उनके तीन पुत्र थे जिनको उन्होंने सब संस्कार पूर्ण वैदिक रीत्यानुसार किये थे। उन्होंने सब संस्कारों से संस्कृत कर नियमानुसार एक दूसरे को पश्चात् सब को गुप्तकुल

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

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