भारतकोश
इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

Devanagarihipublished250 पृष्ठ

पृष्ठ 165, कुल 250 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 165

गर्भ में जीव पहुँचने का समय

अधिकौश व्यक्तियों की धारणा है कि भ्रूण में जीव तीसरे मास पड़ता है, यह भ्रम है। जब कि गर्भाधान के पश्चात् गर्भ द्वार बन्द हो जाता है तो जीव तीसरे मास किस मार्ग द्वारा भ्रूण में पहुँच सकता है। दूसरे जो वस्तु चैतन्य रहित होती है वह एक जगह पड़े-पड़े सड़ने लगती है। जैसे नदी में पड़ा हुआ टापू के बीच का जल गतिहीन होकर सड़ने लगता है। तीसरे जिस प्रकार पेड़ का गुदा काट कर अलग डाल देने से नहीं फल-फूल सकता और ना ही बढ़ सकता है। इसी प्रकार गर्भाशय के मध्य चैतन्य रहित वीर्य सड़कर नष्ट हो जायेगा और जो वृद्धि को भी प्राप्त नहीं हो सकता। खुर्दबीन द्वारा वीर्य में देखने से छोटे-लम्बे आकार का कीट दीखता है। जिसके वीर्य में यह कीट नहीं होता, उस वीर्य से गर्भ स्थित नहीं हो सकता। चाहे जितना समागम करें। इसीलिये शास्त्रकारों ने कहा है, वीर्य को व्यर्थ नष्ट करने से ब्रह्म हत्या का पाप होता है। क्यों? क्योंकि वीर्य में जीव होता है। इससे स्पष्ट है कि जिस समय वीर्य रजः से मिलकर गर्भाशय में जाता है उसी समय जीव भी पहुँचता है। हम पीछे लिख, आये हैं कि जीव शरीर में भोजन द्वारा किस प्रकार वीर्य में पहुँचता है।


गर्भ में पुत्र पुत्री परीक्षा

यदि दाहिना नेत्र किन्चित बड़ा हो, दाहिनी जंघा भारी हो, दाहिना पग चलने में किन्चित देरी से उठता हो तथा प्रथम दाहिने स्तन में दुध आवे। मुख प्रसन्न और रंग उत्तम हो तो पुत्र के लक्षण जाने, इसके विपरीत पुत्री के लक्षण होते हैं। पाँचवें मास गर्भ में बालक के हृदय की ध्वनि आने लगती है। यह ध्वनि एक

इच्छानुसार सन्तान

१५९

वीरेन्द्र गुप्ताः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri