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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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माता के दूध के विकार और शोधन

१-वायु विकार- माता के दूध को काँच के सफेद पात्र में डाल कर देखने से उसका रंग सीवला या लाली की झलक लिए हो, और साथ ही उसमें झागों की अधिकता हो, तथा उसका स्वाद कसैला हो, और जल में डालने से मिलकर एक न हो जाय परन्तु उसके ऊपर रहे, तो दूध में वायु विकार समझना चाहिए।

ऐसा दूध बालक का पेट नहीं भरता, मुँह तथा गले का सूजना, गला बैठ जाना, स्वर क्षीण हो जाना, नींद न आना शरीर सूख जाना, मूत्र का रुकना, मल शुष्क होना आदि रोग हो जाते हैं। ऐसी दशा में माता का दूध शुद्ध करने के लिए दशमूल का क्वाथ सेवन कराना चाहिए।

२-पित्त विकार- माता के दूध का रंग काला, पीला या तीबे के रंग को समान हो अथवा उसे जल में डालने से जल पर पीले रंग की लकीरें सी दिखाई दें। स्वाद में कुछ कुछ खट्टास, कड़वाहट या चरपरापन हो और गर्म प्रतीत हो तो पित्त का विकार समझना चाहिए।

ऐसे दूध से बालक को पतले और पीले दस्त आते हैं, दस्तों में रक्त भी आ जाता है, शरीर गर्म रहता है, प्यास अधिक लगती है और बालक बैचेन रहता है।

ऐसी दशा में माता को गिलोय शतावर, पटोलपत्र, नीम की छाल, लाल चन्दन और सारिवा। इन सबको समान भाग लेकर क्वाथ बनाकर पिलावें।

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

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