इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसन्तति निरोध
वर्तमान समय में कई कारणों से सन्तति निरोध का प्रश्न छिड़ा हुआ है। जो कुछ अंशों में आवश्यक भी जान पड़ता है। मैं इससे पूर्व यह स्पष्ट कर देना उचित समझता हूँ कि यह सन्तति निरोध किस आयु में और कितनी सन्तानों के पश्चात् करना उचित है।
एक दम्पति को अधिक से अधिक ३५ या ४० वर्ष की आयु तक ही सन्तान उत्पन्न करनी चाहिये और अधिक से अधिक ३ बच्चे जिसमें २ पुत्र और एक पुत्री।
आप प्रश्न करेंगे कि, ४० वर्ष की ही आयु तक क्यों सन्तान को जन्म दें, और आगे को क्यों नहीं?
इसका उत्तर यह है कि आज संसार में जो मनोवृत्ति, भाई-भाई, तथा भाई-बहिन के मध्य चल रही है। उस दृष्टि से ३५ या ४० वर्ष तक ही सन्तान को जन्म देना उचित है। हर मनुष्य की प्रवृत्ति होती है कि जब मैं धनोपार्जन करता हूँ तो उससे मैं क्यों ना सुख उठाऊँ? वह यह नहीं चाहता कि यदि उसका पिता मर गया है और उसके २ या ३ और छोटे भाई हैं तो वह अपनी आय से माता तथा भाइयों का पोषण करे। हीं करते भी हैं, परन्तु वह सौ में से १,२ इसलिये कम से कम सन्तान, और कम आयु हीं में सन्तान को जन्म दें, ताकि वह अपने ही सामने पढ़ लिखकर सब के सब अपने पैरों पर खड़े हो सकें, ताकि किसी का भार किसी पर न पड़ सके। मान लीजिये आपने अन्तिम बच्चे को ४० वर्ष की आयु में जन्म दिया और आप
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri