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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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वादाम की मींग, १००ग्राम देसी घी, २००ग्राम शहद। पहले शिलाजीत और दक्षणी मिर्च को बारीक कटुलें, पश्चात् वादाम की मींग डालकर कटें। जब खूब बारीक हो जाय तो शहद और घी को मिला कर उसमें मिला लें। अबलेह तैयार है। नित्य ५ग्राम सेवन करें।

११०- भुंगराज जिसे भाँगरा भी कहते हैं। इसके पंचांग का चूर्ण और बराबर का औवला चूर्ण मिलाकर बलानुसार ४ग्राम की मात्रा में मधु अथवा दूध से सेवन करने से, रसायन रूप है। इसमें यकृति की क्रिया को सुधारने का परम गुण है। जिसके कारण कामला, यकृत वृद्धि, प्लीहा वृद्धि, अर्श, उदर रोग आदि विकार नष्ट होते हैं। स्वास्थ्थ ठीक होता है। परिणामतः बल वीर्य की वृद्धि होती है।

यह नेत्रों की ज्योति को बढ़ाता है, दांतों को रोगों को दूर करता है, केशों को काला बनाता है। कृष्ठ तथा रक्त शोधक है। कैंसर पर भी प्रभावकारी है।

यकृत और प्लीहा की निर्वलता के कारण जो श्लेष्मा शरीर में संचित हो जाता है, जिस कारण रक्त दूषित होकर अनेक विकार उत्पन्न हो जाते हैं, उन सब को भाँगरा निर्मूल कर देता है।

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इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri