इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 36, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ेंस्वास्थ्य
भद्र पुरुषों! संसार में जन्म लेने के बाद कौन-सा जीव-धारी है जो सुख से न रहना चाहता हो। परन्तु वास्तविक सुख बिना स्वास्थ्य (निरोगता) के मिलना कठिन है। इसलिए हर प्रकार से निरोगता के लिये प्रयत्नशील रहना प्राणी मात्र का कर्तव्य है। यह लाभ हमें तभी प्राप्त हो सकता है जबकि हम सात्विक विचारों से अपने प्राचीन महर्षियों के बताये हुए मार्ग का अनुसरण करें। इसी पर मैं अपने कुछ विचारों को श्रृंखलाबद्ध करके पाठकों के सम्मुख लाने का प्रयत्न करता हूँ।
मनुष्य जीवन में शरीर को स्वस्थ रखना कितना आवश्यक है, इसके सम्बन्ध में कुछ भी कहना व्यर्थ है। बाल युवा और वृद्ध, स्त्री या पुरुष, विद्वान या मुर्ख सब ही इस स्वर्णमय अटल और प्रत्यक्ष नियम के समक्ष सिर झुकाते हैं। परन्तु यह हमारा केवल दुर्भाग्य ही है, कि इस नियम के ध्यान में रहते हुए भी हम अपने स्वास्थ्य को नष्ट कर देते हैं। स्वास्थ्य साधन का त्याग क्षणिक सुख अवश्य देता है परन्तु वास्तव में स्वास्थ्य के प्रचण्ड कोट का ऐसा पतन हो जाता है जिसका पुनरुत्थान कठिन ही नहीं असम्भव हो जाता है। सुख के बदले दुःख वलेश और रोगदि 'राक्षस' ही मनुष्य की अन्त्येष्टि क्रिया के मुख्य कारण होते हैं। स्वास्थ्य विगड़ने पर क्या-क्या हानियाँ नहीं होतीं इसका विचार अपने पर ही घटाकर देख लीजिए। परमेश्वर के प्रदान किये हुए अमूल्य रत्न मनुष्य जीवन का दुखान्त दृश्य ही हमारी आँखें खोलने के लिये पर्याप्त है।
अतएव मनुष्य को चाहिए कि अपनी आयु वृद्धि के हेतु स्वास्थ्य कारक साधनों का सदा अवलम्बन करता रहे जिससे वह
रञ्जानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
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