इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 42, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ेंहं भजनीय स्वरूप! सबके उत्पादक, सत्याचार में प्रेरक, ऐश्वर्यदाता! हमें प्रज्ञा दीजिए और अपने दान पर हमारी रक्षा कीजिए! आप, घोड़े आदि उत्तम पशुओं के योग से राज्यश्री को हमारे लिए प्रकट कीजिए। आपकी कृपा से हम लोग उत्तम मनुष्यों के सहयोग से बहुत वीर मनुष्य होंगे।॥३॥
हे भगवान्! आपकी कृपा और अपने पुरुषार्थ से हम लोग इस समय प्रकर्षता तथा उत्तमता की प्राप्ति में और इन दिनों के मध्य में ऐश्वर्ययुक्त और शक्तिमान होंगे। और हे परमपूजित! असंख्य धन देने हारे! सूर्य लोक के उदय में पूर्ण विद्वान् धार्मिक आप लोगों की अच्छी उत्तम प्रज्ञा और सुमति में हम लोग सदा प्रवृत्त रहें।॥४॥
हे सकलेश्वर्यसम्पन्न जगदीश्वर! जिससे आपकी सब सज्जन निश्चय करके प्रशंसा करते हैं वह आप, हे ऐश्वर्यप्रद! इस संसार और हमारे गृहस्थाश्रम में अग्रगामी और आगे सत्य कर्मों में बढ़ने हारे हजिए और जिससे सम्पूर्ण ऐश्वर्ययुक्त और समस्त ऐश्वर्य के दाता होने से आप ही हमारे पूजनीय देव होंगे, इसी हेतु से हम विद्वान लोग सकलैश्वर्य सम्पन्न होके सब संसार के उपकार में तन, मन, धन से प्रवृत्त हों।॥५॥
ब्रह्ममुहूर्त में उठने के सम्बन्ध में एक पश्चिमी कहावत सत्य है। 'अरलि टु बैड एण्ड अरलि टु राइज, इज द वे टु वि हैलिड वैलिड एण्ड वाइज'। अर्थात् सवारी सोना और सवारी जागना स्वास्थ्य ऐश्वर्य और धन की वृद्धि के लिए उत्तम है। वैद्य भी कहते हैं कि दिन को अधिक सोये रहने तथा रात्रि को अधिक जागे रहने का क्रम मत डालो इससे स्वास्थ्य और धन का नाश होता है।
जिस समय श्री रामचन्द्र जी वन यात्रा को जा रहे थे। और पहला विश्राम पंचवटी में किया। उस समय जब भरत जी उनसे मिलने को गये तब उन्होंने श्री रामचन्द्र जी से कहा भ्राताजी
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
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