भारतकोश
इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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जावंगे तथा रजस्वला स्त्री से भी समागम न करे।

जब इन नियमों पर मनुष्य चलते थे तब बच्चे आजकल की भाँति निर्बल, रोगी, अल्पायु नहीं होते थे और अब भी यदि सन्तानोत्पत्ति में नियमों का पालन होने लग तो पुनः वहाँ समय आ जाने की सम्भावना है और फिर से अर्जुन, द्रोणाचार्य और भीष्म जैसी वज्रगंभी सन्तानों उत्पन्न होने लगेंगे।

मनु जी ने विवाह आठ प्रकार के लिखे हैं— ब्राह्मो दैवतर्थेवार्षः प्राजापत्यस्यसासुरः।

गान्धर्वोराक्षसश्चैव पेशाचश्चाष्टमोघमः॥

मनु ३/२१

अर्थ— १. ब्राह्म २. दैव ३. आर्य ४. प्रजापत्य ५. आसुर ६. गान्धर्व ७. राक्षस ८. पेशाच, यह आठ प्रकार के विवाह हैं।

ब्राह्मदिषु विवाहेषु चतुर्विजानुपूर्वशः।

ब्रह्मवर्चस्विनः पुत्रा जायन्ते शिष्टसम्पत्ता॥

मनु ३/२९

अर्थ— ब्रह्मादि चार प्रकार के विवाहों में ही क्रम से ऐसे पुत्र होते हैं जो ब्रह्म, तेजस्वी और श्रेष्ठ मनुष्यों के प्यारे।

रूप सत्त्वगुणोपेता धनवन्तो यशस्विनः।

पर्याप्तभोगा धर्मिष्ठा जीवन्ति च शतं समाः॥

मनु ३/४०

अर्थ— रूपवान्, पराक्रमी, गुणवान्, धनवान्, यश वाले, पुष्कल भोग वाले, धर्मात्मा और सौ वर्ष की आयु वाले होते हैं।

इतरे तु शिष्टेषु नृशंसानृतवादिनः।

जायन्ते दुर्विवाहेषु ब्रह्मधर्म द्विषः सुता॥

मनु ३/४१

अर्थ— शेष दुष्ट विवाह से सन्तान निर्लज्ज, झूठ बोलने वाली, ब्रह्म, धर्म द्वेषी (ब्राह्मणों व धर्मों के शत्रु) उत्पन्न होते हैं।

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

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