भारतकोश
जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

Japji Sahib of Guru Nanak Dev Ji with Hindi Commentary

श्री गुरु नानक देव जी द्वारा

DevanagariHindipublished56 पृष्ठ

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JAPJI SAHIB HINDI SIKHIZM.COM है। नाम सुनने से षट्-शास्त्र, (सांख्य, योग, न्याय आदि), सत्ताईस स्मृतियों (मनु, याज्ञवल्क्य स्मृति आदि) तथा चारों वेदों का ज्ञान उपलब्ध होता है। हे नानक ! संत जनों के हृदय में सदैव आनंद का प्रकाश रहता है। परमात्मा का नाम सुनने से समस्त दुखों व दुष्कर्मों का नाश होता है ॥९॥ सुणिऐ सत संतोख ज्ञान ॥ सुणिऐ अठसठ का इसनान ॥ सुणिऐ पड़ पड़ पावहे मान ॥ सुणिऐ लागै सहज ध्यान ॥ नानक भगता सदा विगास ॥ सुणिऐ दूख पाप का नास ॥१०॥ नाम सुनने से मनुष्य को सत्य, संतोष व ज्ञान जैसे मूल धर्मों की प्राप्ति होती है। नाम को सुनने मात्र से समस्त तीर्थों में श्रेष्ठ अठसठ तीर्थों के स्नान का फल प्राप्त हो जाता है। निरंकार के नाम को सुनने के बाद बार-बार रसना पर लाने वाले मनुष्य को उसके दरबार में सम्मान प्राप्त होता है। नाम सुनने से परमात्मा में लीनता सरलता से हो जाती है, क्योंकि इससे आत्मिक शुद्धि होकर ज्ञान प्राप्त होता है। हे नानक ! प्रभु के भक्तों को सदैव आत्मिक आनंद 13 | Page sikhizm.com