भारतकोश
जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

Japji Sahib of Guru Nanak Dev Ji with Hindi Commentary

श्री गुरु नानक देव जी द्वारा

DevanagariHindipublished56 पृष्ठ

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JAPJI SAHIB HINDI SIKHIZM.COM (ज्ञान) करने वाला (गुरु)। प्रसादि- कृपा की बखिशश। अर्थात्-गुरु की कृपा से यह सब उपलब्ध हो सकता है। ॥ जप ॥ आद सच जुगाद सच ॥ है भी सच नानक होसी भी सच ॥१॥ जाप करो। (इसे गुरु की वाणी का शीर्षक भी माना गया है।) निरंकार (अकाल पुरुष) सृष्टि की रचना से पहले सत्य था, युगों के प्रारम्भ में भी सत्य (स्वरूप) था। अब वर्तमान में भी उसी का अस्तित्व है, श्री गुरु नानक देव जी का कथन है भविष्य में भी उसी सत्यस्वरूप निरंकार का अस्तित्व होगा। सोचै सोच न होवई जे सोची लख वार ॥ चुपै चुप न होवई जे लाए रहा लिव तार ॥ भुखिआ भुख न उतरी जे बंना पुरीआ भार ॥ सहस सिआणपा लख होहे त इक न चलै नाल ॥ किव सचिआरा होईऐ किव कूडै तुटै पाल ॥ हुकम रजाई चलणा नानक लिखिआ नाल ॥१॥ 2 | Page sikhizm.com