भारतकोश
जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

Japji Sahib of Guru Nanak Dev Ji with Hindi Commentary

श्री गुरु नानक देव जी द्वारा

DevanagariHindipublished56 पृष्ठ

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JAPJI SAHIB HINDI SIKHIZM.COM आखण जोर चुपै नह जोर ॥ जोर न मंगण देण न जोर ॥ जोर न जीवण मरण नह जोर ॥ जोर न राज माल मन सोर ॥ जोर न सुरती ज्ञान वीचार ॥ जोर न जुगती छुटै संसार ॥ जिस हथ जोर कर वेखै सोए ॥ नानक उतम नीच न कोए ॥३३॥ अकाल पुरुष की कृपा-दृष्टि के बिना इस जीव में कुछ भी कहने व चुप रहने की शक्ति नहीं है अर्थात् रसना को चला पाना जीव के वश में नहीं है। माँगने की भी इसमें ताकत नहीं है और न ही कुछ देने की समर्था है। यदि जीव चाहे कि मैं जीवित रहूँ तो भी इसमें बल नहीं है, क्योंकि कई बार मनुष्य उपचाराधीन ही मृत्यु को प्राप्त हो जाता है, मरना भी उसके वश में नहीं है। धन, सम्पत्ति व वैभव प्राप्त करने में भी इस जीव का कोई बल है, जिन के लिए मन में जो जुनून होता है। श्रुति वेदों के ज्ञान का विचार करने का भी इसमें बल नहीं है। संसार से मुक्त होने की षट्-शास्त्रों में दी गई युक्तियाँ धारण कर लेने की शक्ति भी इसमें नहीं है। जिस अकाल 47 | P a g e sikhizm.com