भारतकोश
जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

Japji Sahib of Guru Nanak Dev Ji with Hindi Commentary

श्री गुरु नानक देव जी द्वारा

DevanagariHindipublished56 पृष्ठ

पृष्ठ 6, कुल 56 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 6

JAPJI SAHIB HINDI SIKHIZM.COM तो कोई भी आहंकारमयी 'मैं' के वश में नहीं रहेगा। यही अहंतत्व सांसारिक वैभव में लिप्त प्राणी को निरंकार के निकट नहीं होने देता॥ ।२। गावै को ताण होवै किसै ताण ॥ गावै को दात जाणै नीसाण ॥ गावै को गुण वडिआईआ चार ॥ गावै को विद्या विखम वीचार ॥ गावै को साज करे तन खेह ॥ गावै को जीअ लै फिर देह ॥ गावै को जापै दिसै दूर ॥ गावै को वेखै हादरा हदूर ॥ कथना कथी न आवै तोट ॥ कथ कथ कथी कोटी कोट कोट ॥ देदा दे लैदे थक पाहे ॥ जुगा जुगंतर खाही खाहे ॥ हुकमी हुकम चलाए राहो ॥ नानक विगसै वेपरवाहो ॥३॥ 5 | P a g e sikhizm.com