जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा
स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें[ १६ ] विषय पृष्ठ १७६ सतधम्म जातक २३७ [ ब्राह्मण ने पहल अपन ऊंच कुल के अभिमान के कारण चाण्डाल का दिया भात खाने से इनकार किया। पीछे जोर की भूख लगने पर चाण्डाल से छीन कर उसका जूठा भात खाया । ] १८० दुद्दद जातक २४० [ कठिनाई से दिया जा सकने वाला दान देने की महिमा । ] ४. असदिस वर्ग २४४ १८१ असदिस जातक २४४ [ असदिस राजकुमार का विलक्षण धनुविद्या । ] १८२ सङ्गामावचर जातक २४६ [ हाथी शिक्षक ने मङ्गल-हाथी को बढ़ाया व संग्राम जीता । ] १८३ वालोदक जातक २५४ [ सिन्धुकुल में पैदा हुए घोडे अंगूर का रस पीकर शान्त रहे। जब गधेने रस में पानी मिलाकर बचा सो पिलाया गया। वह उछलने-कूदने लगा । ] १८४ गिरिदत्त जातक २५७ [ गिरिदत्त के लँगड़ा होने से घोड़ा लंगड़ाकर चलने लग गया । ] १८५ अनभिरति जातक २५६ [ चित्त की अनियतावस्था ही विस्मृति का कारण हुई।] १८६ दधिवाहन जातक २६२ [दधिवाहन राजा ने मणिकुण्ड छुरी कुल्हाड़ी बान तथा दरी व घडे की मदद से वाराणसी के राज्य पर अधिकार किया । ]