जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा
स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें[ २० ] विषय पृष्ठ २१० कन्दगलक जातक ३३४ [ कन्दगलक ने खदिरवन में रहनेवाले कठफोरनी पक्षी की नकल कर अपनी जान गँवाई । ] ७. धीरत्थम्भक वर्ग ३३७ २११ सोमदत्त जातक ३३७ [ पुत्र पिता को सिखा पढ़ाकर राजा से दो बैल माँगने लगाया। पिता ने राजा से बैल माँगने के बदले कहा— बैल लें । ] २१२ उच्छिद्वभत्त जातक ३४० [ ब्राह्मणी ने अपने पति को अपने जार का जूठा भात खिलाया । ] २१३ भरु जातक ३४३ [ भरू राजा ने रिश्वत से बट वृक्ष के लिए झगड़ने वाले तपस्वियो का झगड़ा बढ़ाया । ] २१४ पुण्णनदी जातक ३४७ [ राजा ने क्रोधित हो अपने बुद्धिमान पुरोहित को निकाल दिया था। पीछे उसके गुणो को याद कर कौवे का मास भेज कर बुलाया । ] २१५ कच्छप जातक ३४६ [ हंस-बच्च अपनी चोंच म एक लकडी पर कछुए को लिए जा रह थे । उसने चुप न रह सकने के कारण आकाश से गिरकर जान गँवाई । ] २१६ मच्छ जातक ३५२ [ कामी मच्छ ने मच्छिया से प्राण की भिक्षा मांगी । ] २१७ सेग्गु जातक ३५४ [ पिता न पुत्री के ग्वारपन की परीक्षा की । ]