जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा
स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें[ ६ ] विषय पृष्ठ १०६ कुण्डकपूव जातक १७ [ अरण्ड वृक्षदेवता ने अपने भक्त के चूरे के पूए को स्वीकार किया । ] ११० सव्वसहारक पञ्हो २० [ यह जातक महाउम्मग जातक (५४६) में आएगी । ] १२. हसी वर्ग २१ १११ गब्भ पञ्हो २१ [ यह जातक भी उम्मग जातक (५४६) में ही आएगी । ] ११२ अमरादेवी पञ्ह २१ [ यह जातक भी उम्मग जातक (५४६) म ही आएगी । ] ११३ सिगाल जातक २१ [ लोभी ब्राह्मण की चादर में गीदड न कार्षापणो के बजाय मलमूत्र त्याग दिया । ] ११४ मितचिन्ती जातक २४ [ मितचिन्ता मच्छ न बहुचिन्ती और अल्पचिन्ती मच्छ की जान बचाई । ] ११५ अनुसासिक जातक २६ [ दूसरा को उपदेश देनेवाली लोभी चिडिया स्वय पहिए के नीचे आकर मर गई । ] ११६ दुब्बच जातक २६ [ शिष्य का कहना न मान अपनी सामथ्य के बाहर पंवित्त शक्ति साधने वाल आचार्य न प्राणो से हाथ धोए । ] ११७ तित्तिर जातक (२) ३१ [ वाचाल तपस्वी तथा तित्तिर की जान अधिक बोलने के कारण गई । ]