भारतकोश
जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा

स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)

DevanagariHindipublished479 पृष्ठ

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पादञ्जली ] ४५५ लालुदायी होठ चबाना छोड और अधिक कुछ नही जानता था। इतना कह पूर्व-जन्म की कथा कही— ख. अतीत कथा पूर्व समय में बाराणसी म ब्रह्मदत्त के राज्य करने के समय बोधिसत्त्व उसके अर्थधर्मानुशासक आमात्य हुए। राजा का पादञ्जली नाम का पुत्र मूर्ख था, आलसी था। आगे चलकर राजा मर गया। आमात्यो ने राजा का क्रिया कर्म करके, किसे राज्याभिषिक्त करे सलाह करते हुए कहा कि राजपुत्र पादञ्जली को। बोधिसत्त्व ने कहा—यह कुमार मूर्ख है, आलसी है। परीक्षा करके इसे राज्याभिषिक्त करें। आमात्यो ने मुकद्दमा बना कुमार को पास बैठा मुकद्दमे का फैसला करते हुए ठीक फैसला नही किया। उन्होने अस्वामी को स्वामी बना कुमार से पूछा—कुमार ! क्या हम लोगो ने ठीक फैसला किया ? उसने होठ चबाए। बोधिसत्त्व ने समझा मालूम होता है कुमार पण्डित है। वह समझ गया होगा कि मुकद्दमे का ठीक फैसला नही हुआ। ऐसा मानकर पहली गाथा कही— अद्धा पादञ्जली सम्बे पञ्जाय अतिरोचति, तथाहि ओट्ठं भञ्जति उत्तरिं नून पस्सति ॥ [ पादञ्जली निश्चय से प्रज्ञा म सबसे बढकर है। इसीसे होठ चबाता है। निश्चय से इसे दूसरी बात दिखाई देती है ।] निश्चय से पादञ्जली कुमार सम्बे हम पञ्जाय अतिरोचति तथाहि ओट्ठ भञ्जति नून उत्तरिं दूसरे कारण को पस्सति । उन्होने दूसरे दिन भी एक मुकद्दमा तैयार कर उस मुकद्दमे का ठीक से फैसला कर पूछा—देव ! कैसे क्या यह ठीक से फैसला हुआ है ? उसने फिर भी होठ चबाए। उसकी मूर्खता की बात जान बोधिसत्त्व ने दूसरी गाथा कही— नाय धम्म अधम्म वा अत्यानत्थं च बुज्झति, अञ्ञत्र ओट्ठनिब्भोगा नाय जानाति किञ्चन ॥