जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 335, कुल 588 में से
संदर्भ में पढ़ें(4) श्री-मान् (2) य-शो-वि-त्त-वान् (5)? That's 11?
Let's count:
प्रा ज्ञ श्चा प वि ल ग्न जः (8)
कु ल व रः (4) श्री मान् (2) य शो वि त्त वा न् (5)? No:
कु (1) ल (1) व (1) रः (1) = 4
श्री (1) मान् (1) = 2
य (1) शो (1) वि (1) त्त (1) वा (1) न् = 5? Total 11 syllables? That's not Anushtubh!
Wait, what meter is this?
Let's check the second half:
... कुम्भीरसमुद्भवश्च रमणीलोलः शठो दीनवाक् ॥ १०६ ॥
कुम् भी र स मुद् भ व श्च (8)
र म णी लो लः (5) श ठो दी न वाक् (5) = 10?
Wait! In the printed text, look at the line:
प्राज्ञश्चापविलग्नजः कुलवरः श्रीमान् यशोवित्तवा-
न्वा कुम्भीरसमुद्भवश्च रमणीलोलः शठो दीनवाक् ॥ १०६ ॥
Wait, why does it say ॥ १०६ ॥?
Look at the verse number: