भारतकोश
जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

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(4) श्री-मान् (2) य-शो-वि-त्त-वान् (5)? That's 11? Let's count: प्रा ज्ञ श्चा प वि ल ग्न जः (8) कु ल व रः (4) श्री मान् (2) य शो वि त्त वा न् (5)? No: कु (1) ल (1) व (1) रः (1) = 4 श्री (1) मान् (1) = 2 य (1) शो (1) वि (1) त्त (1) वा (1) न् = 5? Total 11 syllables? That's not Anushtubh! Wait, what meter is this? Let's check the second half: ... कुम्भीरसमुद्भवश्च रमणीलोलः शठो दीनवाक् ॥ १०६ ॥ कुम् भी र स मुद् भ व श्च (8) र म णी लो लः (5) श ठो दी न वाक् (5) = 10? Wait! In the printed text, look at the line: प्राज्ञश्चापविलग्नजः कुलवरः श्रीमान् यशोवित्तवा- न्वा कुम्भीरसमुद्भवश्च रमणीलोलः शठो दीनवाक् ॥ १०६ ॥ Wait, why does it say ॥ १०६ ॥? Look at the verse number: