भारतकोश
जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

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४६४ सटीकजातकपारिजाते- सितेन्दुजीवार्कजभानुलोहितैः सिताकिर्जीवार्कभृगाङ्कसोमजैः ॥ एकत्र यातैर्गगनाटनैः सदा भवन्ति जाता मुनयस्तपस्विनः ॥ ३० ॥ सितेन्द्रित्यादि । १-शुक्र-चन्द्र-गुरु-शनि-सूर्य-मङ्गलैः, वा २-शुक्र-शनि-गुरु-सूर्य- चन्द्र-बुधैः, एकत्रयातैरेभिः गगनाटनैः = ग्रहैः जाता नराः सदा तपस्विनः मनयो भवन्ति ॥ शुक्र, चन्द्रमा, वृहस्पति, शनि, सूर्य और मङ्गल एकत्र हों वा शुक्र, शनि, वृहस्पति, सूर्य, चन्द्र और बुध एकत्र हों तो जातक तपस्वी होता है, यह मुनि लोग कहते हैं ॥३०॥ कुजज्ञवागीशसितासितारुणैः सितार्किजीवेन्दुजचन्द्रभूमिजैः ॥ बलप्रधानैर्गगनाटनैयदा यदि प्रजातः पुरुषस्तपस्विनाम् ॥ ३१ ॥ कुजज्ञेति । १-मङ्गल-बुध-गुरु-शुक्र-शनि-सूर्यैः, वा २-शुक्र-

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