जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५३४ सटीकजातकपारिजाते- ( प्राणदण्डः = फाँसी ), स्थानच्युतिं = पदभ्रष्टताम्, मित्रविरोधं=बन्धुवैरञ्च वदेत् ॥ ४४ ॥ यदि धनेश पापग्रह हो तो शनि, मंगल, राहु, सूर्यकी अन्तर्दशा मे धनका नाश होना कहे हैं। पाप ग्रहसे युक्त हो वा पाप ग्रहकी राशिमें हो तो भी वही पूर्वोक्त फल हो ॥४३॥ धन भावमें पापग्रह उसका स्वामी हो तो उसकी दशामें राजकोपसे मान-धनका नाश हो। फांसी हो। स्थानच्युति और मित्र विरोध हो ॥ ४४ ॥ पापग्रहे विक्रमभावनाथे पापान्विते पापवियच्चराणाम् । अन्तर्दशायामरिशन्रुचोरैर्दुःखं समायाति शुभान्विते वा ॥ ४५ ॥ दुश्चिक्यभावाधिपदायकाले मन्दारभोगिध्वजभानुमुक्तौ । नाशं वदेत्तत्र सहोदराणां भवेद्विशेषात्सहजैर्विरोधः ॥ ४६ ॥ इदानीं सहजेशदशायामन्तर्दशाफलमाह-श्लोकद्वयेन स्फुटार्थेनेति ॥ ४५-