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जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

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( चौखम्भा प्राच्यविद्या ग्रन्थमाला ३ ) मन्त्र-योग-संहिता मूल सहित अंग्रेजी अनुवाद डॉ० राम कुमार राय प्रोफेसर, मनोविज्ञान विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी यह एक मात्र उच्च कोटि की मन्त्र योग की पुस्तक है जिसमें क्रमवार कदम- कदम पर मन्त्र योग का स्पष्टीकरण पाया जा सकता है। यह मन्त्र-योग के सभी सोलहों अङ्गों का विवेचन करता है । अर्थात् भक्ति, शुद्धि, आसन, पञ्चाङ्ग सेवन, आचार, धारणा, दिव्य-देश-सेवन, प्राण-क्रिया, मुद्रा, तर्पण, हवन, बलि, याग, जप, ध्यान और समाधि । इस संहिता में सभी तरीकों एवं व्यवहारों की इतनी पूर्ण व्याख्या हुई है कि यह संहिता एक हस्त पुस्तक के रूप में प्रयोग की जा सकती है जो मन्त्र-साधना का प्रायोगिक दिशा प्रदान कर सकती है । इसके अतिरिक्त यह विस्तार से बराबर मन्त्र फलित ज्योतिष ( नक्षत्र विद्या, दैवज्ञ विद्या ) की अवधारणा करता है । जिसकी सहायता से कोई एक उसकी सत्यता का निर्णय कर सकता है। मन्त्र साधना के लिए अपने लिए उचित मन्त्र का चुनाव कर सकता है। साधना के लिए समय और स्थान का चुनाव पहले से निश्चित करना कि किसको गुरु बनाया जाय और मन्त्र साधना में कैसे आगे बढ़ा जाय । हमारा उद्देश्य है उन सभी आवश्यक तत्त्वों का जो मन्त्र साधना के लिए आवश्यक है और जो समर्थ ( फलोत्पादक ) मन्त्र हैं उनकी विस्तृत जानकारी देना । आचरण की प्रकृति यहाँ तक बढ़ गयी है कि इस वर्गीकृत पुस्तक में हिन्दुओं का प्राचीन विज्ञान भी है और वह इतना वैज्ञानिक है कि यह उच्च शिक्षा प्राप्त करने वालों या शिक्षितों में एवं सभी बातों में सन्देह करने वालों को भी प्रभावित करती है और वे सभी मन्त्रों की सफलता एवं उसके प्रभाव ( गुण ) के विषय में समझने लगते हैं । इसीलिए हमने कार्य क्षेत्र के बाहर जो साधक सारे विश्व में फैले हुए हैं उनके लिए प्रथम बार अंग्रेजी अनुवाद के साथ इसे प्रस्तुत करने का प्रयास किया है तथा इसे उस विस्तृत क्षेत्र में साधकों में प्रवेश पाने के योग्य बनाया है । इसमें बहुत अधिक चार्ट, आकृति ( मानचित्र ) एवं तस्वीरें हैं जो साथ-साथ एक रास्ते का निर्माण करती हैं और जो अधिक ग्राह्य हैं अर्थात् समझ में आने योग्य हैं । ३५-००