भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पम गिने जाते हैं। वे लोग मांस न खाते थे, जिस समय ग्रीस और टर्कीके विजयका झण्डा फहरा रहा था उस समय उनके लड़ाके विजयी सैनिक लोग भी मांस नहीं खाते थे। जबसे उन्होंने पुरानी आदतको छोड़के मांस खाना आरम्भ कर दिया तभीसे उनके दुःखका आरम्भ हुआ। यद्यपि उनकी अवनतिके कारण दूसरे भी थे पर इसमें सन्देह नहीं कि, ग्रीसके व्यायाम शालाओंमें अभीतक शारीरिक बलकी बड़ी २ फुर्तियां और आश्चर्यजनक कर्तव्य दिखाये जाते थे तभी तक उनकी कार्य-वाहीकी बड़ी प्रसिद्धी थी, जबतक कि, वे मांस नहीं खाते थे। जबसे उन्होंने मांस खाना आरम्भ कर दिया तबसे बड़े बड़े बहादुर शूरवीर और फुर्तीले पहलवान लोग, शनैः २ आलसी निरुद्यमी और निकम्मे होने लगे। रालिन्स साहबकी पुराने इतिहासकी भूमिका देखो उसमें यही लिखा हुआ है।

प्रोफेसर फार्ससाहब — जो मांसाहारी नहीं हैं, उनका शरीर मांसाहारियोंकी अपेक्षा साधारणतः भारी होता है, उनके पुट्टे दृढ़ और बलिष्ठ होते हैं, परिश्रमके कठिन कार्योंसे भी नहीं घबड़ाते। प्रोफेसर फार्स साहबने इस विषयमें बहुत कुछ जांच की है। वे कहते हैं कि, मांस खानेवाले अंग्रेजोंकी अपेक्षा मांस न खानेवाले उनके भाई स्काटलेण्डके रहनेवाले अधिक ग्रांडील, बड़े भारी बलिष्ठ शरीरके होते हैं। स्काचोंकी अपेक्षा आइलैण्डवासी आइरिश लोग, रोटी आलू खाकर जीवन व्यतीत करते हैं, वे शारीरिक बल आदिकमें इनसे भी अधिक श्रेष्ठता रखते हैं।

डाक्टर लैम्ब — भी अपनी जांचमें उसी परिणाम तक पहुँचते हैं। उनका विचार है कि, केवल मांसाहारी लापलेण्डके रहनेवाले वह बहुत नाटे होते हैं उन्हींके बराबरीके जोतिन्सके लोग ठीक वैसेही जलपानीमें रहते हैं, नाज सब्जी आदिकके विशेष खानेसे स्वीडन और नारवेवालोंके समानही अच्छे डील डौलवाले होते हैं।

कतिपय चिन्ह — साधारण प्राकृतिक चिन्होंसे मनुष्यका मांस आहारी होना सिद्ध नहीं होता। क्योंकि, मनुष्यके शरीरसे उसी प्रकार पसीना निकलता है, जिस प्रकार कि, अन्य जीवधारियोंके शरीरसे निकलता है। मांस आहारी पशुओं के शरीरसे पसीना नहीं निकलता।

मांस आहारी पशु अपना भोजन चबाचबाकर नहीं करते पर मनुष्य अन्य घास आहारियों जीवधारियोंके समान चबा २ कर भोजन करता है। मनुष्य दूसरे घासाहारी जीवधारियोंके समान घूँटसे पानी पीता है पर मांस आहारी जीवधारी जिह्वासे चाट २ कर खाता है। मनुष्य दूसरे घासाहारी जीवधारियोंके