भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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जैसे कि, अभागको सुन्दर स्त्री त्यागकर जाती है वैसेही मादक पदार्थ (शराब, गॉजा, भंग, चरस, तम्बाकू, अफीम, धतूरा, मजूम आदि सर्व मादक पदार्थ) को सेवन करनेवालोंको बुद्धि भी त्यागकर चली जाती है।

मद्यपानके दोष—शराबकी मस्तीमें मा, बहिन, स्त्री, पुत्री आदि किसीका कुछ भी ध्यान नहीं होता, विधि, निषेध हराम हलालका कुछ भी विवेक नहीं होता, शराबके ही कारण लूत जैसा नवी महापापका भागी बना। मद्यप निर्लज्ज और महापातकी होता है उसमें शुभगुणकी गन्ध भी नहीं होती। वह सब शुभ-कर्मों का वैरी है। अहङ्कार और अभिमानसे भरा होता है, अपनेको अपने गुरु और पिता आदिक प्रतिष्ठित पुरुषोंसे बुद्धिमान् तथा अच्छा समझता है। शराबीकी नशेकी हालतमें कुत्ता उसके मुंहपर मूतकर चला जाता है और वह अभाग समझता है कि, मेरे मित्रने गुलाब छिड़का। शराब पीनेवाला, मूत लगे पागलके समान नाचता फिरता है। मद्यपके सब अङ्ग और इन्द्रियाँ ऐसी निर्बल हो जाती हैं कि, कोई काम ठीक ठीक नहीं होता। मदिरा पीनेसे शुद्धि शौच नष्ट हो जाता है। मदिरासे इस प्रकार दया नष्ट हो जाती है जैसे कि, अग्निके लगानेसे घास फूस जल जाते हैं। इसी प्रकार सब मादक पदार्थ दया, क्षमा, सत्य, धैर्य, विचार, शील, सन्तोष, शम, दम आदि सब सद्गुणोंको नष्ट कर देते हैं। ऐसा अवगुण कौन और पाप है जिसको नशेबाज नहीं करता, मादक पदार्थके सेवीसे कभी किसीकी भलाई नहीं हो सकती। शराबी और मादक पदार्थोंका व्यसनी सर्वदाही झूठा माना जाता है। उसको सच्चे भले मनुष्योंकी संगति कदापि नहीं प्राप्त होती।

मदके नशामें पड़ा हुआ मनुष्य पागलोंके समान गाता रोता, हंसता और क्रोध आदिक व्यवहार करता है। मद्य पीकरही कृष्ण भगवान्के पुत्रने दुर्वासा ऋषिकी हँसी की थी जिसके कारण यादवोंका वंश नष्ट हो गया। शराब और अन्य मादक पदार्थोंके सेवन करनेवालोंको किसी शास्त्र और धर्मके बुद्धि-मानोंने अच्छा नहीं गिना है उसकी निन्दाही की है। यदि शराब पुठठोंमें लग जाय तो आदमी फौरन् मर जायगा, यह सर्व रोगोंकी जड़ है मृत्युका चिह्न है लोक परलोकमें अप्रतिष्ठा और दुःख उपजानेवाली है। मदिरा पीनेसे ऐसे ऐसे पापकर्म होते हैं जो कभी नहीं भूलते।

उदाहरण—मैंने किसी किताबमें देखा था कि, फारस मुल्कका एक राहुजावा था। युवा अवस्थामें उसका गवना हुआ। मकसाबेके दिन भली प्रकार मद्य पीकर अपनी स्त्रीके मकान चला। जाते जाते नशेकी तरङ्गोंमें