भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1044, कुल 1367 में से

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जन्य सब शब्द दोके मिलनेसे ही प्रगट होते हैं, एकसे कोई शब्द नहीं होता ।
कुरानके मुख्यधर्म ।

बिसमिष्ठाहरिरहेमानीरहीम

(मीम) (लाम) (अलिफ)

कुराणका स्पष्ट विवरण ये तीन अक्षर हैं जो कोई इन तीन अक्षरोंका अर्थ भली प्रकार समझे बूझे वही मुसलमान है इस (मीम) (लाम) (अलिफ) के बहुत गूढ़ अर्थ हैं । इन तीन अक्षरोंके अतिरिक्त और भी बहुत से अक्षर (मुक़्त आत और मुफ़रदात) हैं, पर यथार्थमें ये तीनही हैं—इस कारण ये तीनहीं सबके प्रथम रखे गये हैं । दूसरी सूरे बकरकी यह पहली आयत है । जितने इमाम और कुरानके टीकाकार हुये, किसीने इन तीनों अक्षरोंकी व्याख्या न की, किसीने इसका अर्थ समझा । हां यदि कुछ समझा हो तो मुहम्मद साहबने समझा हो, जो कुछ समझा होगा वह किसीसे न कहा, न यह भेद किसी पर प्रगट किया । फुकराओ (महात्माओं) में से भी जिसने इसका आशय समझा किसी पर प्रगट न किया, क्योंकि, इन तीन अक्षरोंकी ओटमें ईश्वरी सब भेद भरे हुये हैं, जो कोई प्रगट करेगा दण्ड पावेगा । सब धर्म (मजहब) उसीका है, सब कुछ आपही आप है । ये तीन अक्षर सबके पहिले रखे गये हैं, समस्त कुरानका सार है । इन तीनों अक्षरोंके भेद आशयको जान लेनेसे, फिर हिन्दू, मुसलमान, ईसाई आदि किसी धर्मसे धर्मद्वेष अथवा पक्षपातका झगड़ा नहीं रहता । इन तीनों अक्षरोंकी पहचान कोई सच्चा मुसलमानही करेगा ।

सबका एक — कुरानमें लिखा है कि, जो आदम नूह, इबराहीम, इसहाक, याकूब और मूसाका खुदा है, वही मुहम्मदका भी है । फिर उनके ईश्वरी ज्ञानके विषयमें विशेष लिखना और प्रमाणोंका लाना, कुछ आवश्यक नहीं दीखता । हजरत आदमसे लेकर मुहम्मद मुस्तफा तक इसी खुदाके माननेवाले हैं । इसी खुदाकी पूजा करते हैं । सब पश्चिमके पैगम्बरोंका निशाना उसी तरफ है दूसरी तरफ नहीं है । क्या पश्चिम, क्या पूरब, क्या उत्तर, क्या दक्षिण, समस्त संसारके ऋषि, मुनि, सिद्ध, साधु, योगी, यती, तपी, संन्यासी आदि उसी ईश्वरकी उपासना करते आये हैं ।

सबका सार — मूल एक शब्द ॐ है, ॐ कारकी माता केवल एक बिन्दी है । उससे इस बिन्दीका प्रकाश है, जो अगम, अगोचर, अनाम, निःअक्षर आदि है । वही सबका एक पिता है, वही अद्वैत है जब उसकी पहचान हो तभी

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