कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1063, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंरूप है जो छल कपटसे भरी हुई है, समस्त संसारमें इसका छल, कपट प्रसिद्ध है। यह माया अपने हावभाव और कपटसे पुरुषको अपना दास बना लेती है, उसकी समस्त आयुको भ्रष्ट कर देती है। मायाके तीन रूप हैं— १ जड़, २ चैतन्य, ३ बाणी। इन्हीं तीनों रूपोंसे संसारको अपने वश कर रही है, सहस्रों कला कौशलें तथा १४ विद्याएँ मायाकी लीला हैं। इनसे जब तक विरक्त न होगा तब तक अपने मूलको न पावेगा इसी कारण सन्तको उचित है कि, इन तीनोंको त्याग दे। जो इनके त्यागे बिना दूसरोंको उपदेश करता है वह चोर और डाकूके समान है। ऐसे बिना करनीके कथनीवाले झूठेका विश्वास भूलकर भी न करना चाहिये। मायाने अपने पांच रूह बनाकर जगत्की रचना की उसीके सब रूप हैं जितने बूतपरिस्त हैं वे सब मनुष्यत्वसे रहित हैं जितने लोग तन, मन, धनसे बुरे विषयसे प्रीति करते हैं शरीरहीके पोषण पालनमें लगे रहते हैं, वे सब मायाके दास हैं।
यथा— जगतमें है जबतक यह तनपरवरी। यमस्सर कहां हो उसे सर्वरी ॥
यही तीन माया जहां जाल हैं। सो पांचों शिकारी वहां काल है ॥
सर्व ब्रह्मज्ञानी सर्वदासे इसी बातकी साक्षी देते हैं कि, जबतक जीवन मृतक न होवे तबतक भवसागर न तरेगा।
चक्रोंसे स्वर व्यञ्जनोंका प्राकट्य—जितने लोग वेद और किताबोंके पाठसेही मुक्ति प्राप्त करना समझते हैं, वे भूलमें हैं। इसी कारण मैं एक दृष्टान्त लिखता हूँ। ये स्वर और व्यञ्जनके अक्षर कहाँसे निकले ?
पहले कण्ठमें विशुद्ध चक्र है, वह सोलह पंखुरियोंका कमल है, वहाँसे सोलह स्वर निकलते हैं।
फिर अनाद चक्र हृदयमें है वहाँसे बारह अक्षर निकले। वे बारह अक्षर क-ख-ग-घ-ङ-च-छ-ज-झ-ञ-ट-ठ ये हैं, ये वर्ण हृदय स्थित कमलके बारहों दल हैं। इसके नीचे नाभस्थानमें स्थित कमलके दश दल हैं। उसको मणिपूरक चक्र कहते हैं, उनपर क्रमसे—ड-ढ-ण-त-थ-द-ध-न-प-फ वर्ण हैं। इसके नीचे लिङ्ग मूल कमलके छः दल हैं, उसको स्वाधिष्ठान चक्र कहते हैं उसके पंखुरियोंपर छः अक्षर हैं— ब-भ-म-य-र-ल-गुदामूलमें चार पत्तोंका कमल है, उसे आधार चक्र कहते हैं उसके पंखुरियोंपर व-श-ष-स-चार वर्ण हैं। येही संस्कृत वर्णमालाके अक्षर हैं।
वर्णोंकी मा—इन्हीं स्वर और व्यञ्जनोंसे सब माकूलात मनकूलात यथार्थ रोचक और भयानक वाणियां लिखी गई हैं, सभी अक्षरोंके अर्थ और