कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1105, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंपढ़े इल्मों अमल सारे चढ़े जा लामकाँ ऊपर ।
बजुज तुझ रहनुमाई रह न सूझे दाज बाकी है ॥
न रह रौशन ब सदहा मशअल व महताब अख़्तरके ।
कि अबतक नूर सूरै सारशबद व हाज बाकी है ॥
हुई काफूर दिल आजिजसे ख्वाहिशे दीन दुनियांकी ।
मगर सतगुरु सना ख्वानी हवस यह आज बाकी है ॥
कबीर साहिब कृत षड् देह वर्णन ।
कबीर साहिबने अपने शब्दोंमें छः प्रकारके देहोंका वर्णन किया है जिनमें आकर यह जीव पूर्ण पतित हो गया था, । साथके साथही उनका अर्थ भी कर दिया है जिससे पाठक गण आनन्दसे समझ लें । “सन्तों ! षट् प्रकारकी देही, स्थूल, सूक्ष्म, कारण, महाकारण, कैवल्य हंसकी लेही।” कबीर साहिब कहते हैं कि, ए महात्माओ ! छः प्रकारकी देहें हैं । वे स्थूल, सूक्ष्म, कारण, महाकारण, ज्ञान और विज्ञान ये हैं ।
स्थूल शरीर या कच्चे तत्त्वकी देह ।
सन्तों षट् प्रकारकी देही ।
स्थूल सूक्ष्म कारण महाकारण कैवल्य हंसकी लेही ॥
साढ़े तीन हाथ प्रमाना देह स्थूल बखानी ।
राता वरण जाग्रित वस्था वैखरी बाचा जानी ॥
रजो गुणी ॐ कार मात्राका त्रिकुटी है अस्थाना ।
मुक्ति सालोक प्रथम पद गायत्री ब्रह्मा वेद बखाना ॥
पृथिवी तत्व खेचरी मुद्रा मग पील घट कासा ।
क्षर निर्णय बड़वाग्नि दशेन्द्रो देव चतुर्दश बासा ॥
और अहै ऋग्वेद बताऊँ अर्द्ध शून्य सञ्चारा ।
सत्यलोक विषया अभिमानी विषयानन्द हंकारा ॥
आदि अन्त ओ मध्य शब्द है लखै कोई बुद्धि बीरा ।
कहैं कबीर सुनो हो सन्तों इति स्थूल शरीरा ॥ १ ॥
स्थूलदेह, साढ़े तीन हाथ, रक्तवर्ण, ब्राह्मी देवता, रजोगुण, ओंकार मात्रिका, जाग्रत अवस्था, वैखरी वाचा, त्रिकुटी स्थान, पृथिवीतत्त्व, खेचरी मुद्रा, कपिल मार्ग, मठाकाश, नेत्र स्थान, सत्यलोक, विश्वअभिमानी, गायत्री प्रथम पद, क्षर निर्णय, बड़वाग्नि, विषयानन्द आकार, आप तत्व, दश इन्द्रो, रहस मात्रिका, अर्द्ध शून्य, ऋग्वेद, चौदह देवता, पचीस प्रकृति ।