भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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हैं उनके विष्णुके हाथमें गदा—कौमुदा, चक्रमुदशंन, नन्दक—असि, शारङ्ग—धनुष्य और शंख पांचजन्य इत्यादि रहते हैं जिससे वे अपने वैरियोंपर विजय पाते हैं। इसी विष्णुकी पूजा समस्त संसार करता है, जहाँ २ कठिनाइयाँ आ पड़ती हैं वहाँ गुरुडपर सवार होकर विष्णु महाराज आन उपस्थित होते हैं और उस कठिनाईको सरल करते हैं। आपकी सवारीका गुरुड ऐसा शीघ्रगामी है कि एक पलभरमें सवालाख योजना उड़ जाता है। सप्तद्वीप, पृथ्वी तथा आकाश सब मानों आपके चरणोंके नीचे हैं और वैकुण्ठमें बैठकर सब जीवोंकी पाप पुण्यके हिसाब करते हैं, चित्रगुप्तजी आपके मंत्री हैं, सबके पाप तथा धर्मका खाता आपके पास रहता है। विष्णु महाराजकी आज्ञासे कोई नरक कोई वैकुण्ठ और कोई परमधामको जाता है। सब देवता ब्रह्मा शिव कुबेर इन्द्र इत्यादि विष्णुकी सेवामें सदा उपस्थित रहते हैं। यह वैकुण्ठ सुमेरु पर्वतके शिखरपर अत्यन्त सुन्दर बना हुआ है। विष्णु वैकुण्ठ तथा सब स्थानों पर व्यापक हैं। तीनों लोकके कर्ता धर्ता आपही हैं, जब कोई जीव पृथ्वीपर मरता है तब विष्णुके सामने उपस्थित किया जाता है और आपहीकी आज्ञासे पाप पुण्यका फल भोगता है।

तेतालीसवाँ प्रकरण

ब्रह्मपुरी कौलास, और अमरावती अदन इत्यादीका वृत्तान्त ।

ब्रह्माके लिये ब्रह्मलोक और शिवके निमित्त कौलास ऊपर बने, वैसेही पृथ्वीपर भी काशी धाम अत्यंत सुन्दर स्थान पुण्य धाम बना, जहाँ ब्रह्मा तथा शिव दोनों भाई विराजमान हुए। विष्णुने अपने निमित्त वैकुण्ठ बनाया और ब्रह्माके निमित्त आनन्दवनकी रचना की और यही आनन्द बन पृथ्वीपर वैकुण्ठ कहलाया।

अदन क्या है ?

पूर्वकालमें इसका नाम आनन्दवन था। आनन्द नाम हर्ष तथा प्रसन्नताका है और वन नाम वाटिकाका है, ये दोनों शब्द संस्कृतके हैं सो अरब-वासियोंको संस्कृतशब्दका विशुद्ध उच्चारण नहीं आनेके कारण आनन्द-शब्दका उलटकर अदन कर दिया और वनका अनुवाद फारसी तथा अरबीमें बाग है। यह आनन्दवन बड़ाही मनोरञ्जक स्थान विष्णुने तय्यार करके ब्रह्मा तथा सावित्री को वहाँ रखवा, जहाँ वे दोनों आनन्दसे रहा करते थे। इस आनन्द बनमें कल्पवृक्ष, अमृत और सुखविलासके सब सामान थे। उसी आनन्दवनको

१ अर्बीमें कल्प वृक्षको “दरख्शत तूना” कहते हैं। २ अमृत को अर्बीमें “आन कौसर” कहते हैं।