भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1155

अज्ञानी डरकर भटकता फिरता है पर कहीं भी सुख नहीं पाता, स्वप्नमें भी प्रतिष्ठाका दर्शन नहीं होता, ऐसा पक्षपाती किसी प्रकार भी किसीको सन्तोष नहीं दिला सकता । पक्षपाती धर्म द्वेषमें पड़ा हुआ एकही हृदमें कोल्हूके बेलकी तरह फिरा करता है, वह कभी उस असीम अनन्त परमात्माका ज्ञान नहीं प्राप्त कर सकता, जहाँ वेदवाणी भी नहीं पहुँच सकती, जिसके भेदको बड़े २ ज्ञानी ऋषि मुनि नहीं पा सकते, ऐसा पक्षपाती सूर्य उसको कैसे पा सकता है ? ऐसा पक्षपाती पुरुष अपनी बुद्धि और विवेकको कभी काममें नहीं लाता, इस कारण उसे सद्गुण और उत्तम पदकी प्राप्ति नहीं होती, वह अभागही रहता है ।

गजल—यह अबस मर्द जिन्दगानी है । अस्ल इसरार गर न जानी है ॥

कुछ तफक्कुर नहीं न दिलमें तमीज । यह सब अज्ञानकी निशानी है ॥

कहीं रोजा निमाज और पूजा । कहीं कोरे आँ वेद ख्वानी है ॥

मैं बड़ा और मेरा धर्म है बड़ा । और न इसके कोइ सानी है ॥

कभी अगला धर्म न हम छोड़ें । यह हमारी रविश पुरानी है ॥

हम हैं हरदो जहाँमें तजावर । मेरे मुशिदकी मिहरवानी है ॥

ऐसे इनसानको न हो इल्म कभी । झूठको सच जिसने जानी है ॥

कोह जंगल अबस फिरे मारा । दशत सेहराकी खाक छानी है ॥

आदमी जाद के याके द्वाब । शाखेदम अब तलक न आनी है ॥

पढ़के माकूल मन मगन जो होवे । दिल लगन किससा और कहानी है ॥

सिर उसका न हो कभी मालूम । वहाँ पहुँचे न वेद बानी है ॥

गर करे फिक्र कौल आजिज पर । बदो दारैन हुकम रानी है ॥

बुद्धिमान् मनुष्य वही है जो दोषोंको देखकर पक्षपात न करे । शीघ्रही अज्ञानताके मार्गको छोड़ दे ।

दृष्टान्त—एक आदमी व्यापारके लिये परदेश गया । वहाँ से कुछ उपा-
जंन करके जब लौटा तो उसने मार्गमें एक लोहेकी खान देखी । सभोंने लोहा
उठा लिया, कुछ और आगे चलनेपर ताँबेकी खान मिली, लोहाको फँककर
ताँबा उठा लिया पर उनमेंसे एकने न लोहा फँका न ताँबा लिया । यद्यपि उसके
साथियोंने बहुत समझाया पर उसने किसीका कहना नहीं माना । कुछ और
आगे चलनेपर एक चाँदीकी खान मिली, वहाँसे सभोंने ताँबा फँककर चाँदी
उठाली पर लोहेवालेने लोहाही रखा, चाँदी न ली । वहाँ भी उसके साथियोंने
बहुत समझाया पर उसने किसीका कहना न माना । कुछ और आगे चलनेपर
सोनेकी खान मिली सभोंने चाँदी फँक दी सोना ले लिया, पर उस लोहेवालेने