भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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र्ण हो । आसुरी सम्पत्तिका त्याग करे । जहाँतक होसके निषिद्ध घृणित व्यवहार
प्रीका संकल्प न भी करे । किसी जीवधारीको किसी प्रकार भी कष्ट न पहुँचावे ।

परमात्माने मनुष्यका पद देवतोंसे भी श्रेष्ठ बनाया है। क्योंकि, देवतालोग
स्वर्गमें रहतेही हैं उनको स्वर्ग प्राप्तिके लिये कुछ भी यत्न नहीं करना आता ।
इसके बिना वे मोक्षको भी प्राप्त नहीं कर सकते, मनुष्य असंख्य रुकावटोंको पारकर
स्वर्ग तथा मोक्षको प्राप्त कर लेता है । यही कारण है कि, खुदाने आदमका पुतला
बनाकर सब फिरिस्तोंको आज्ञा दी थी कि, आदमको नमस्कार करो । शैतानने आदम
से अपनेको अच्छा समझा इसी कारण लोकसे निकाला गया । मनुष्य पदके सन्मुख
स्वर्गादि सब तुच्छ हैं पर जिस प्रकार शैतानने आदमसे आपको अच्छा समझा,
वह पतित हुआ । उसी प्रकार जो अहं लावेगा अपनेको अच्छा और दूसरोंको तुच्छ
समझेगा वह अवश्य नीचेकी ओर गिरेगा । अथवा जो पक्षपात करके अपनेकी
अथवा किसी दूसरोंको देहाभिमानमें फँसावेगा, वह शैतान और शैतानका भाई
है । न जाने किस स्वरूपमें सत्यगुरु मिल जाय । इस कारण सबसे नम्र और अधीन
होकर दास भावमेंही वर्तें, यही मनुष्यका श्रेष्ठ धर्म है ।

अहंकारहीके कारण जीव अपने सत्य और सुखमय स्वरूपसे पतित हुआ
है । चौरासी लाख योनिमें भटकने और नाना प्रकारके दुःख सहनेका मूल कारण
देहाभिमान ही है । मनुष्यका पद सब पदोंसे उच्च है। क्योंकि, जीव मुक्त होकर
मिल जावे । सब देवते उसके आगे दण्डवत नमस्कार करते हैं । मनुष्यपद सब पदों
में श्रेष्ठ पद है ।

इस कारण जो मनुष्य बनना चाहता है उसको मनुष्यका लक्षण धारण
करना चाहिये । यदि राजाका कोई भी ओहदेदार, अपना कर्तव्य ठीक २ न करे
तो दरबार से निकाल देने और पदसे गिरा देने लायक होता है वह पतित भी हो
जाता है । इसी प्रकार मनुष्य अपने लक्षणको न धारण करेगा, तो किस प्रकार
मनुष्य के पदका अधिकारी हो सकेगा ।

जो चाहता है कि, मनुष्य पदको यथार्थ प्राप्त करूँ तो उसे मनुष्यके लक्षणों
को धारण करना चाहिये । मनुष्य लक्षणको धारण करकेही, परमात्माका
कृपापात्र बननेसे सर्वोत्कृष्ट मनुष्यपद पा सकता है । उदारता १, वीरता २, न्याय
३, शील ४ और गुरुकी आज्ञाकारिता येही लक्षण अपने यथार्थस्वरूपको प्राप्त
करनेके हैं । जिसने इन चार लक्षणोंको प्राप्त कर लिया उसे नाना शास्त्र पढ़नेकी

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