भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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लिखाकर और किया कर वस्फ उसकी । जबों अपनोको गोया कर विरिहिनी ॥
तुही तुही तुही तू देख हर रुख । तु दिल दरिया बिलाया कर विरिहिनी ॥
तुयक रुख हो नजर कर अपने आजिज । भरम दरिया डुबोयाकर विरिहिनी ॥

रोतेही शामसे सेहर आया । यार अबतक न मेरे घर आया ॥
आह व नालोंमें सारी गुजरी रात । मेरी महरू न मन मिहर आया ॥
करूँ तदबीर कौन है चारा । किस लिये उसके दिल क्रहर आया ॥
मेरी भिन्नत सुना मेरे क्रासिद । अब तलक नहीं प्यामबर आया ॥
नहीं आसूँके तार टूटेंगे । अबतो दिल दीद अपना भर आया ॥
तुही तू तूही तू नजर आवे । हमः मौजब सर बसर आया ॥
नहीं तुझसे है खाली कोई जाय । हर जगह एकसा नजर आया ॥
किस लिये वस्लसे किया महरूम । शोम बद मेरा काम कर आया ॥
हो गया सख्त क्यां तेरा दिल मोम । क्या करूँ अबतो उससे दर आया ॥
तेरा दामन न छोड़ेगा आजिज । जान लग तक मेरा अगल आया ॥
नहीं तेरा जो मुशिद मिहरवों है । तो एकही ढंग जाहिलो वेद ख्वों है ॥
अगर तिशनःसे तू होवे जो बेताब । तो साक्री हाथ प्याला हरजमाँ है ॥
अगर प्यासा नहीं तो क्या पिलावे । वह दायम दूर तुझसे बेगुमाँ है ॥
जहां चाहे तु पीय प्याले इश्क । तुझ क्या खौफ पीले दमाँ है ॥
तुझे मिलनेकी जब हो बेकरारी । तू पीव उसकी जहाँ दूढे वहाँ है ॥
दरू भी वह बेरुसे तुझको देखे । वह जाहिर और परदः निहाँ है ॥
नहीं पहचानता उसको वह तकसीर । अब उस पहचान आँख एसी कहाँ है ॥
नहीं दिलगीर माल और जानदेखुद । करशमये नाजका शेवः बुताँ है ॥
कि, तेरा आह व नाला गिरियः जारी । कशीदः दिल करे दिलबर जहाँ है ॥
कि, तू नाचीज व नालायक है आजिज । और वह बसके ऊपर शहनशाहूँ है ॥

तेरा खुशतर जमाल ऐ पाक दामन । तु खुश खुल्क और ख्याल ऐ पाक दामन ॥
सितारोंमें है जैसे बन्द रौशन । तु सब सखियोंमें लाल ऐ पाक दामन ॥
है तू जो अपने पीतमकी प्यारी । तेरा खुश वक्त हाल ऐ पाक दामन ॥
तेरे हुसनो नमक नाजो अदाके । मुकाबिल न जमाल ऐ पाक दामन ॥
फटे कपड़े व मैली गर तेरी भेस । तेरा बरतर जलाल ऐ पाक दामन ॥
इधर और उधर हरगिज तू न ताके । तेरा फजलो कमाल ऐ पाक दामन ॥
खसम अपनेकी तू फर्मा बर्दारि । मिलेंगी लागजाल ऐ पाक दामन ॥
तेरा खाविन्द हक तुझसे मिलादे । तू आजिज हो बहाल ऐ पाक दामन ॥