कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1234, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंजो बोले संस्कृत मीठी तु मोरा । तेरा गर्दन भी धरकर काल तोरा ॥
तु अंगरेज़ी ो बोले बोल मैना । तेरा भी टूटेगा यकरोज़ डैना ॥
जो शिरीं बोल तूती फारसी है । पकड़ पिंजरेमें तुझको ड़रासी है ॥
ऐ मँढक तू सिलंगी बोल बोला । तेरे सरके ऊपर जमकर कलौला ॥
फ़रासीसी लातीनी सिख वैरा । तेरी गर्दन ऊपर भी छुरी फ़ेरा ॥
जो मेगपयी बोलयी सदहा जवानों । तुझे मारेंगे धर कहरवानों ॥
ज़ीलतसे रज़ीलत घरमें जावे । अगर सदहा जवानें सीख आवे ॥
हुआ हैवान तू इनसान मूरत । न पहचाना जो अपनी अस्ल सूरत ॥
किया था किसलिये आदमको पैदा । हुआ तू किसके ऊपर आनके शैदा ॥
तू खालिक याद कर अपना ऐ नादों । शबोरोज़ो शाम बाम दादों ॥
॥ ल-यह मान मड़क तेरा सो दो दिनमें गुज़रजा ।
यह भीड़ भड़क डेरा सो दो दिनमें गुज़रजा ।
यह शान और शौकत इधर उधरका सैर ।
हर चार सिम्त फेरा सो दो दिनमें गुज़रजा ॥
यह माल मुल्क जाह और हशमत व कुलाह ।
यह दुनअबी उरझेरा सो दो दिनमें गुज़रजा ॥
इससे न बड़ी नेमत है यह देह बशरकी ।
कागज़का दुनी बेरा सो दिनमें गुज़रजा ॥
सत नाम यक साहब सच पकडले आजिज़ ।
यह तेरा और मेरा दो दो दिनमें गुज़रजा ॥
छिपाया यारको ऐ शोर बखते । लखाया ग़ारको ऐ शोर बखते ॥
किया दिलने मेरे दिलबरसे परदः । जताया नाज़को ऐ शोर बखते ॥
रहे रहमां तू कर दिया बन्द । बताया मारको ऐ शोर बखते ॥
जहर धरदी हेयाते आबकर दूर । कियाबन्द कारको ऐ शोर बखते ॥
नहीं नेमत सरासर गन्दगाकी । लगा अम्बारको ये शोर बखते ॥
गया जब भूल आजिज़ ठग भूलाया । दिया दारको ऐ शोर बखते ॥
साधुसेवा जो त्याग दुनियादार । हर तरफ देख आगदुनियादार ॥
देख आतश जिधरको जावेगा । फिर किधर जावे भागदुनियादार ॥
साधुगुरु बिनकहां ठिकाना और । है पड़ा पीछे नाग दुनियादार ॥
कुछ कर सोच दिलमें ऐ नादां । अब तू उठ और जागदुनियादार ॥