भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1255

(उस यमदूत) ने कहा कि, अब यह बात नहीं हो सकती । राजाने कहा कि, घोड़ेसे उतरने दो । उसने यह भी स्वीकार नहीं किया राजा घोड़े परही मर गया । सब अहंकार धूलमें मिल गया । यह संसारी वैभव मनुष्यको अन्धा बना देता है ।

यही दशा शद्वाह बादशाह की हुई थी । उसने बारह वर्षमें स्वर्ग बनवाया पर जब उसे देखने चला तबही यमदूत मिला उसके साथियोंके साथ उसे पाताल भेज दिया ।

जो लोग नमरुद और फिरऊनके समान ईश्वर विमुख हैं उनको कभी चेत नहीं होता । लाखों प्रकारकी युक्ति की जावें । नानाप्रकारकी सिद्धियाँ और भय उपजानेवाली लीला दिखाई जावें पर वे नहीं समझते, जहाँ सांसारिक वैभव होता है उसकी अधिकता पाकर मनुष्य अवश्य ही अन्धा हो जाता है ।

कँसा धर्म स्वीकार करना चाहिये ।

जो कोई किसी (मजहब) को स्वीकार करना चाहे उसे उचित है कि, प्रथम छः बातोंको विचार करले, भली प्रकार परीक्षा कर पीछे स्वीकार करे । वे छः बातें ये हैं ।

१ गुरु, २ आचार्य, ३ शास्त्र, ४ देव, ५ नाम और ६ धाम ?

जैसे १ गुरु पारख, २ आचार्य कबीर साहब, ३ शास्त्र स्वसंवेद, ४ देव सत्त पुरुष, ५ नाम शब्दसार अथवा मुक्तिकाद्वार शब्दसार, ६ धाम सत्यलोक । जो कोई उपरोक्त विषयोंके बिना विचारे किसी धर्मको स्वीकार करेगा वह अवश्य बन्धनमें पड़ेगा ।

यह सारा संसार माया है, स्वामी सेवक सब माया है । अकली और नकली सब माया है जो कुछ कहा और सुना जाता है । सब माया है, मायाकी ही आटेमें ब्रह्म है । जैसे माताकी ओटमें पिता छिपा है, माताको सब देखते हैं पर पिताको कोई नहीं देखता, माताने आपको प्रगट किया, पिताको गुप्त रक्खा । यह देह छःधातुओं से बनता है जिसमेंसे तीन धातु चर्म, मांस, लोह, माताका अंश हैं शेष तीन अस्थि (हाड) गूद (मज्जा) विन्द (वीर्य) पिताका अंश है । जो कोई पिता से मिलना चाहता है उसको चाहिये कि, अन्तःकरणसे माताका स्नेह निकाले । तात्पर्य यह कि, जब-चर्म, मांस, रक्त परसे दृष्टि उठावेगा तब हाड और गूद विन्दको देखेगा । दोनोंसे जो कोई भिन्न हो सो अद्वैत अनुपमका दर्शन पावे । सब मनुष्य माया और ब्रह्मके ध्यानमें लगे हैं, इसी प्रकार मायाके बन्धनसे बाहर नहीं जा सकते । वेद, किताब, शरअ, शास्त्र सब मायामें ही है, इनके पार होना कठिन है ।