भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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कबीर साहब कहते हैं कि, संसार ठगोंको अपना ईश्वर जानकर पूजता है । उसके परिणाममें जन्म जन्म दुःख पाते हैं, जिस प्रकार बकरा कसाईसे प्रीति कर उसके निकट जाता है, उसका शिर काटा जाता है । यदि उसे इस बातका ज्ञान होता कि, यह तो मेरा अधिक है तो क्यों पास जाता ? उससे क्यों प्रीति करता, बरन् उससे वो पृथक् होकर भाग जाता गला कटानेसे बड़िचत रहता ।

कबीर साहब और हंस कबीर चारों युगोंसे समझाते चले आते हैं । पर प्राकृतिक संसारी जीव ऐसे अज्ञानान्ध हो रहे हैं कि, उसपर ध्यान नहीं देते । बारम्बार उसीसे प्रीति करते हैं जो कि, अपने जालमें फँसाकर मार लेता है । मनुष्य और पशुका विवेक ।

मनुष्यको विचार करना चाहिये कि, मनुष्य और पशुमें किस बातका भेद है । शारीरिक व्यवहारमें सब समान हैं । लौकिक पारलौकिक सब सामग्री दोनों की एकसी प्राप्त हैं । यदि भेद है तो इतनाही कि, मनुष्यको वह ज्ञान प्राप्त हो सकता है, जिससे मुक्ति हो सकती है, क्योंकि मुक्तिका कारण ज्ञान मनुष्य शरीर में ही प्राप्त हो सकता है, प्रकृतिने केवल मनुष्य शरीरकोही वो श्रेष्ठता दी है जिससे कि, सारशब्दको प्राप्तकर सत्यपदको प्राप्त हो ।

सांसारिक धन वैभवके लिये लड़ना, झगड़ना, मरना, मारना, जीत हार पाना सब पशु धर्म हैं । विषय वासनाकी अपेक्षा करके एक चक्रवर्ती राजा व महान् दुःखी दरिद्री पुरुष दोनों तुल्य हैं । एक राजा अथवा जाति दूसरेसे लड़ते, भला बुरा कहते और द्वेष करते हैं वो सब पशु बुद्धिसेही करते हैं, क्योंकि, ये गुण पशुओं में देखे जाते हैं ।

जंगली घोड़ोंका झुण्ड और उनके चरनेके खेत अलग अलग होते हैं यदि एक झुण्डका कोई घोड़ा दूसरे झुण्डमें आजाय तो परस्पर घोर युद्ध करते हैं । इसी प्रकार बन्दरोंमें भी है कि, जब एक झुण्डके बन्दरको अथवा उनके किसी पदार्थको दूसरे झुण्डके बन्दर कुछ दुःख देते अथवा कुछ लेलेते हैं तो दोनों मण्डलियोंमें तुमूल युद्ध होता है ।

बटेरोंके पकड़नेवाले अपने पालक बटेरको लेजाकर ऐसे खेतोंमें बाँध देता है जहाँ बहुतसे बटेर हों, उसके चारों ओर दूरतक जाल फैला देता है । जब वह पालक बटेर शब्द करता है तो उसके शब्दको सुनकर उस खेतके रहनेवाले जंगली बटेर दौड़कर उसे मारने आते हैं क्योंकि, उनको इस बातपर क्रोध आता है कि, हमारी जागीरमें यह दूसरा बटेर क्यों आया । उसके निकट जाते २ सबके सब जालमें फँस जाते हैं । इसी प्रकार जो मनुष्य परस्पर राग द्वेष करके

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