कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1277, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ें१८ प्रश्न—मनुष्योंको ईश्वरने क्यों बनाया ।
उत्तर—जिस प्रकार कसौटीसे सोना परखा जाता है, कसौटीके द्वाराही खरा खोटा जाना जाता है, उसी प्रकार चौरासी लाख योनिमें मनुष्य योनि कसौटीके समान हैं इसमें आकर भले बुरेकी पारख हो जाती है । कसौटी ठीक हो तो सोनेके गुण अवगुणको ठीक बता सकती है । कसौटीमें दोष हो तो गुण दोषको ठीक नहीं बता सकती । इसी प्रकार मनुष्यको ईश्वरने इस कारण बनाया है कि, गम्भीर सारग्राहणी बुद्धिसे नित्य अनित्यका विचार करके अनित्य और भ्रमसे अलग हो जावे । इसी कारण मनुष्य सारी सृष्टिमें सर्व जीवधारियोंमें श्रेष्ठ है क्योंकि, मनुष्य शरीरको बिना पाये कोई मुक्तिका अधिकारी नहीं हो सकता । मनुष्य शरीरके अतिरिक्त जितने शरीर हैं वे इतने मुक्तिके अधिकारी नहीं जितना कि, मनुष्य शरीर है ।
१९ प्रश्न — मनुष्यका मरमरकर कहाँ जाते हैं ?
उत्तर—सब मनुष्य मरकर भ्रमपुरीको जाते हैं । भ्रमपुरीसे आते हैं, हमेशाही भ्रमपुरीमें रहते हैं । माता, पिता अपना पराया सारा संसार भ्रमही है ।
२० प्रश्न—मनुष्य नियत आयुके पहले क्यों मर जाता है ?
उत्तर — पापसे आयुक्षोण होती है । पुण्यसे बढ़ती है । किसीके भी पुण्य पाप क्यों न हों वे अवश्य अपना फल दिखाते हैं ।
२१ प्रश्न—भिन्न भिन्न उत्पत्तिका निर्णय, प्रत्येक धर्ममें उत्पत्तिका वर्णन भिन्न २ क्यों है ।
उत्तर — यह सृष्टि बारंबार उत्पन्न होती और नष्ट होती है । इसको उत्पत्तिके अनेक ढङ्ग हैं जिसको जैसा सूझा उसने वैसाही वर्णन कर दिया । अबतक किसीने भी स्पष्ट रीतिसे यह नहीं लिखा है कि, आदि उत्पत्ति कब और किस प्रकार हुई जो लिखते हैं वो अपनी कल्पनासेही लिख डालते हैं ।
२२ प्रश्न — सृष्टिका हेतु, जब केवल एकही अद्वैत ईश्वर था, दूसरा कुछ न था तो सृष्टि कैसे हुई ?
उत्तर—सृष्टिका कारण भ्रम और अज्ञानके सिवा दूसरा कुछ नहीं है । जब आदमीको उन्माद होता है तो मस्तिष्क बिगड़ जाता है, जिससे उसकी दृष्टिमें नाना प्रकारके रूप भासते हैं उसको देखके कभी वह हर्ष मानता है तो कभी शोक करता है, कभी देखकर डरता है, कभी रोता है, कभी हँसता है, कभी आश्चर्य करता है, यानी उन्माद ग्रस्त मनुष्यके मुखके नाना प्रकारके भाव प्रगट होते रहते हैं, उनके भावोंके प्रगट होनेका कारण केवल उन्मादही होता