कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1282, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ें“जैसी रूह वैसे फिरिश्तः” के अनुसार जैसा अपना कर्म होता है वैंसाही फल मिलता है ।
३३ प्रश्न—कियेका बदला, संसारमें किये हुये कम्मोंका बदला मिलेगा अथवा नहीं ?
उत्तर—किये हुये कम्मोंका फल अवश्य भोगना पड़ेगा । जो कोई किसी जीवधारीको किसी प्रकार दुःख पहुँचावेगा उसे भी दुःख पहुँचेगा ।
३४ प्रश्न—अगम्यकी गति, जो किसी युक्ति और तर्कसे न जान पड़े उसे किस प्रकार जानना चाहिये ?
उत्तर—गुरुकी सैन और मौनसे ।
३५ प्रश्न—कबीर पन्थकी विशेषता, मौन तो प्रत्येक धर्मवाले बतलाते हैं फिर आपमें क्या विशेषता हुई ?
उत्तर—हममें और अन्य धर्मियोंमें यह भेद है कि, उनके गुरु त्रय देव हैं जो मुक्त नहीं हैं हमारा गुरु नित्यमुक्त कबीर है । वही नित्य मुक्त कबीर समस्त जीवोंको क्षण मात्रमें मुक्त कर सकता है । वही सब शक्तिमान है ।
३६ प्रश्न—पूजाका निर्णय, किसकी पूजा, किसके अनुसार करना उचित है ।
उत्तर—सत्यपुरुषकी पूजा, स्वसंवेदके अनुसार करे ।
३७ प्रश्न—पापके कारण, संसारमें पापकी वृद्धि क्यों हुई ?
उत्तर—मनुष्यका हृदय विषयवासनासे पूर्ण है, पापकी अधिकताका यही कारण है । जब मनुष्यके हृदयसे विषयवासनाकी इच्छा नाश हो तब पाप भी नष्ट हो जावेंगे ।
३८ प्रश्न—मोक्ष मार्ग, ज्ञान और शरणागति इनमेंसे किससे मुक्ति होती है ।
उत्तर—भक्ति और ज्ञानसे भी मुक्ति होती है परन्तु शरणागतिका यह तो सर्वोच्च पद है यदि शरणागतिके नियमकी पूर्णता होसके ।
३९ प्रश्न—कर्मकी स्थिति, जब शरीर न रहेगा तो कर्म कहाँ रहेगा ?
उत्तर—जब स्थूल शरीर नहीं रहेगा तो कर्म सूक्ष्म शरीरके संग रहेगा ।
४० प्रश्न—नियामक, शुभ अशुभ, पाप पुण्य किसने बनाये ?
उत्तर—पाप पुण्यका नियामक काल पुरुष है ।
४१ प्रश्न—सृष्टि स्वाभाविक है, ईश्वरको सृष्टि उत्पन्न करनेकी क्या आवश्यकता थी ?