भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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७५ प्रश्न—अज्ञान किसको लगा ?

उत्तर—अज्ञान, अहंकार और देहाभिमानको लगा है ।
रक्षकका अवतार ।

७६ प्रश्न—जब संसारमें पापकी वृद्धि होती है भक्तों तथा पुण्यात्माओं पर कष्ट पड़ता है तब विष्णुका अवतार होता है कबीरसाहबका अवतार क्यों नहीं होता ?

उत्तर—जब संसारमें अत्याचार और अन्याय होता है, उस समय संसारके रक्षकको आनेकी आवश्यकता है । ऋषि, मुनि, पीर पैगम्बरोंकी आवश्यकता नहीं ।

जीवन मुक्ति और विदेह मुक्ति ।

७७ प्रश्न—वशिष्ठ ऋषिने वेदानुसार जीवनमुक्ति और विदेह मुक्ति रामचन्द्रजीको कही है उसका आशय क्या है ?

उत्तर—जितने ऋषि, मुनि, सिद्ध साधु, पीर पैगम्बर और नानाभक्तोंके आचार्य हुए हैं वे सब बालकके समान खेलमें लगे हुए हैं, जिनको जो अच्छा लगा उसीको उसने ग्रहण कर लिया । दूसरोंको भी वही बतलाया । जिसकी जिसने मानिन्दी करली वह उसीमें आनन्द मान रहा है । जब सब े लने खेलाने-बालेको ज्ञान प्राप्त होगा तब वे कबीर साहबके शरण जाकर सत्य पदको पावेंगे ।

७८ प्रश्न—वशिष्ठजी तो रघुवंशकी गुरुआईके लिये शरीर धारण करते हैं, क्योंकि, अधिकारी लोगोंको बारम्बार शरीर धारण करना आवश्यक हैं ।

उत्तर—वे प्रारब्धके अनुसार रघुवंशकी गुरुआईके लिये देह धर कर रहे हैं, शिष्योंके लिये पक्षी भी बनना है, पड़ा प्रारब्धको भोग कर फिर फिर अमर पदपर स्थिर हो जायेंगे यही अन्योंकी भी बातें हैं ।

७९ प्रश्न—ऐसे २ माहात्मा पुरुषोंको पशु पक्षियोंकी योनि क्यों धरनी पड़ती है ?

उत्तर—उस समय यही प्रारब्धमें होगा उसको भोगकरही नष्ट होना था पर ज्ञान उनका उस देहमें भी पूरा था ।

शब्द—बहुरि नहीं आवना यह देश ॥

जो जो गये बहुरि नहिं आये, को घर कहें संदेश ॥

सुर न मुनि और पीर औलिया, देवी गौरि गणेश ॥

धरि अवतार सबी मुनि प्रगटे, ब्रह्मा विष्णु महेश ॥