भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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जपजी ।

एक ओंकार सत्तनाम कर्ता पुरुष निभों निर्वैर अकाल मूर्ति अयूनी सई
भंगुर प्रसाद जप आदि सच युगादि सच है भी सच नानक होसीभी सच ।

टीका ।

एक ओंकार — नानक साहब कहते हैं कि, पहले एक ओंकार कर्ता पुरुष उत्पन्न हुआ जिसने समस्त ब्रह्माण्डको उत्पन्न किया । तीन लोक, चार वेद, और ग्यारह इन्द्रिये तथा संसारमें जितने धर्म कर्म हैं वे सब उसीसे प्रगट हुये, तीन लोक उसीकी उपासना करता है । निगुण और सगुण उसीके सब रूप हैं । ब्रह्मा, विष्णु महेश और आदि भवानी तथा सारे ऋषि मुनि सिद्ध साधु पंगम्बर आदि सब उसीकी आज्ञा में रहते हैं । उसीने चार खानि, चौरासी लाख योनि नरक, स्वर्ग, शुभ अशुभ, पाप, पुण्य आदि बनाकर संसारके जीवोंको बन्धनमें डाल दिया है । उसीने सबको आवागमनमें फसाया है । सत्पुरुषकी भक्ति छिपाकर मुक्तिका मार्ग बन्द कर दिया है । संसारके मनुष्योंकी बुद्धि भ्रष्ट कर किताबोंमें फँसा मारा । मनुष्य आँधोंके समान टटोलते फिरते हैं पर किसीको शु मार्ग नहीं मिलता । सब किसीकी आत्मापर झूठी आत्माकी चौँकी बिठादी है कि, कोई भी सत्यकी ओर न जाने पावे ।

नानक साहब कहते हैं कि, एक ओंकार अर्थात् ओंकार एकही है उससे समस्त संसार पूर्ण हो गया । दुःखियोंकी दुःखको दूर करनेकी दयाकर सत्त नाम कर्ता पुरुष प्रगट हुआ । जो जीवधारी उसकी शरणमें आये उसने उन सबका बन्धन काट दिया इसीसे वो बन्दीछोर कहलाता है ।

सत्त नामकर्ता पुरुष—जब एक कर्ता पुरुषने इस प्रकार संसारमें अन्धेर मचाया तो सत्त नाम कर्ता पुरुष प्रगट हुआ । वह सत्त नाम कर्ता पुरुष सब अव-गुणों से शुद्ध पवित्र है उसके विषयमें नानक साहब यों कहते हैं ।

एक अर्ज गुफ़्तम पेश तू दरगोश कुन करतार ।

हक्का कबीर करीम तू बे ऐब परवर दिगार ॥

जो है वो बा ऐब (अवगुण सहित) परवरदिगार है । और हक्का कबीर बे ऐब परवर दिगार है । जब वह सत्त नाम कर्ता पुरुष पृथ्वीपर आया तब असत्त नाम कर्ता पुरुषका सब धोखा छल कपट, नष्ट हो गया । जितनी प्रशंसा और उत्तम गुण हैं वे सब सत्त नाम कर्ता पुरुषके हेतु हैं । फिर वह कँसा है ।


१ जो टीकाकी गई है यह शिष्योंके मतसे नहीं किन्तु ग्रन्थ कर्तक स्वयंके मतसे है सिद्ध ऐसा अर्थ नहीं करते ।