कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1356, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंसामा न सरे देखिये इस अहद हमारे ॥
सब फितनः भरे देखिये इस अहद हमारे ॥
कोई न सुने पन्द न पहचान न देखे ॥
अन्धे भरे देखिये इस अहद हमारे ॥
इल्म व अमल सब है अबस बाद फरोशी ।
गोया घरे देखिये इस अहद हमारे ॥
है कौन गुरु और कहाँ धर्म खुदा है ।
कोई न डरे देखिये इस अहद हमारे ॥
नेकीसे भगे सारे है बेपार बदीका ।
जब सबको घरे देखिये इस अहद हमारे ॥
इस अहदके आदमके अमल पर जो नजर कर ।
कोई न तरे देखिये इस अहद हमारे ॥
आई जो खिजा बाद गुलिस्तां में सब गुल ।
पजमुर्दा पड़े देखिये इस अहद हमारे ॥
जब आकर अन्न तेरी बारिशो वारा ।
सूखे लहर देखिये इस अहद हमारे ॥
आजिजको बशारत हैं यह सतगुरु शब्दसाख ।
सब खुशक हरे देखिये इस अहद हमारे ॥
मुखम्मस ।
जुज मिहर तुम्हारी कहीं आराम न होवे ।
इस दार फना नेक सरन्जाम न होवे ॥
तदबीर व तकदीरसे कुछ काम न होवे ।
निस जायमें इकता वह गुलन्दाम न होवे ॥
दोजख है सरापा जहाँ सत्तनाम न होवे ।
जब किशवरे हस्तीसे चले हंस अदमको ।
किस शान व शौकतसे लिये शब्द अमलको ॥
तत्र ब्रह्म विचारा फिर जा चूम कदमको ।
बाजारमें आकरके जो पहचान सनमको ॥
फिर आशिके सौदा यह कभी खाम न होवे ।